भारतीय छात्रों को हिरासत में रखने के मामले में बड़ा खुलासा

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लंदन, आइएएनएस। फेसबुक ने कहा है कि अमेरिका के इमिग्रेशन एंड कस्टम इंफोर्समेंट (आइसीए) ने उसके प्लेटफार्म पर फर्जी अकाउंट खोलकर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। इन अकाउंट का संबंध एक ऐसी फर्जी यूनिवर्सिटी से था, जिसके जाल में सैकड़ों छात्र फंस गए थे। इस यूनिवर्सिटी का शिकार बनने वालों में करीब 90 फीसद भारतीय छात्र थे। इनमें से 129 भारतीय छात्रों को हिरासत में ले लिया गया था।

गार्जियन अखबार में गुरुवार को छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये फर्जी अकाउंट कथित तौर पर आइसीई के गृह सुरक्षा जांच विभाग की ओर से खोले गए थे। फेसबुक के एक प्रतिनिधि ने अखबार से कहा, ‘कानून प्रवर्तन अधिकारियों समेत हर किसी के लिए यह अनिवार्य है कि वे फेसबुक पर अपने वास्तविक नाम का इस्तेमाल करें। फर्जी अकाउंट के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है, हम ऐसे अकाउंटों पर कार्रवाई करेंगे।’ अमेरिका के डेट्रायट शहर में फार्मिग्टन यूनिवर्सिटी नाम से फर्जी प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोली गई थी। इस यूनिवर्सिटी की अपनी वेबसाइट के साथ फेसबुक और ट्विटर अकाउंट भी थे, लेकिन इसका कोई कैंपस नहीं था।

[रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए खुली थी यूनिवर्सिटी]
अमेरिका में विदेशियों को अवैध रूप से रहने में मदद करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए गोपनीय अभियान के तहत यह यूनिवर्सिटी खोली गई थी। इस रैकेट को चलाने वाले आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था। ये सभी भारतीय बताए गए हैं। इसके अलावा 129 भारतीय छात्रों को भी हिरासत में लिया गया था।

[जाल में फंसे थे 600 छात्र]
इस यूनिवर्सिटी में करीब 600 छात्रों ने दाखिला लिया था। इनमें करीब 90 फीसद भारतीय छात्र थे। दाखिला पाने के लिए प्रत्येक छात्र ने 25 हजार डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) का भुगतान किया था। मामले में भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को डेमार्श (आपत्ति पत्र) जारी करके भारतीय छात्रों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी।

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