मणिपुर से बेनई मानशे यहूदियों का सबसे बड़ा पलायन…इस साल 432 गए इजरायल

इजरायल की 10 खोई हुई जनजातियों में से एक बेनई मानशे का वंशज माना जाता है इन यहूदियों को

मिजोरम और मणिपुर से पलायन जारी…वर्ष 2006 में हुआ था पहला पलायन

मणिपुर। देश के पूर्वोत्तर में स्थित मणिपुर से बेनई मानशे नामक यहूदियों का पलायन जारी है।

ये यहूदी बड़ी संख्या में इजरायल जा रहे हैं और वहां की नागरिकता ले रहे हैं।

करीब 228 बेनई मानशे नामक यहूदियों का एक दल रविवार को इजरायल के लिए रवाना हो गया।

इस दौरान इम्फाल हवाई अड्डे पर इन्होंने कहा कि अब हम मणिपुर वापस नहीं आएंगे, क्योंकि, हमारा धर्म हमारे लिए बहुत अहम है। अब हम स्थायी रूप से इजरायल में ही रहेंगे। ज्ञात हो कि भारत के पूर्वोत्तर के

राज्यों में बेनई मानशे नामक समुदाय के करीब 9000 यहूदी लोग रहते हैं।

इनमें से आधे मणिपुर और मिजोरम में है। इन यहूदियों को इजरायल की 10 खोई हुई

जनजातियों में से एक बेनई मानशे जनजाति का वंशज माना जाता है।

बेने मानशे शब्द का अर्थ इस क्षेत्र में फैले चिन-कुकी-मिजोस उर्फ चिकिम जनजातियों को संदर्भित करता है।

3000 यहूदी अब तक कर चुके पलायन

मणिपुर में यहूदियों के इजरायल प्रवासन की देखरेख करने वाली संस्था शैवी इजरायल के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 3000 यहूदी इजरायल जा चुके हैं।

वहीं हजारों लोग वहां जाने को तैयार हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में पहला पलायन हुआ था, तब मिजोरम से करीब 213 यहूदी इजरायल गए थे।

इसके बाद वर्ष 2007 में मणिपुर के 233 लोगों का पलायन हुआ था।

हालांकि, वर्तमान प्रवासन सबसे बड़ा है, क्योंकि, इस साल 432 लोग पलायन कर चुके हैं। इनमें इस साल फरवरी में करीब 204, 10 जून को 228 यहूदी तो पलायन कर चुके हैं।

वहीं 22 जून को भी करीब 20 यहूदियों के पलायन करने की संभावना है।

धर्मांतरण बता भारत ने किया था विरोध

वर्ष 2005 में यरूशलम स्थित रब्बीनिक कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर यह माना कि बेनई मानशे समुदाय इजरायल की 10 खोई हुई प्रजातियों में से एक है। उसके बाद भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रह रहे

इस समुदाय के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद जन प्रवासन अनुमोदन से पहले कुछ लोग पर्यटकों और छात्रों के रूप में इजरायल गए थे। लेकिन,

बाद में यहूदी धर्म में परिवर्तित हो गए और इजरायल के नागरिक बन गए।

हालांकि, भारत ने इसका जमकर विरोध किया। क्योंकि, इसे धर्मांतरण के रूप में देखा गया।

धार्मिक शिक्षा के बाद मिलती है पूर्ण नागरिकता

मणिपुर में शैवी इजरायल के सहायक प्रबंधक हारून वाइफेई कहते हैं कि

अब पलायन करने वाले लोगों को इजरायल में एक साल की नागरिकता प्रदान की जाती है।

बुनियादी धार्मिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें पूर्ण नागरिकता दी जाती है।

एक बार नागरिकता देेने के बाद 18 से 25 वर्ष के लोगों को तीन साल की अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए चुना गया है वहीं 60 वर्ष से ऊपर की आयु वालों को वृद्धावस्था पेंशन दी जाती है।

वाइफेई कहते हैं कि यह इजरायल सरकार पर निर्भर करता है

कि वह कितनी अवधि के लिए प्रवास की अनुमति दे।

साथ ही साक्षात्कार के बाद ही पलायन की स्वीकृति दी जाती है। साक्षात्कार में

यहूदी धर्म और उसके जीवन से सम्बंधित सवालों पर आधारित होता है।

पवित्र भूमि पर लौटने की इच्छा

मणिपुर के चुराचंदपुर जिले के 57 वर्षीय यहूदी निमचिन तुथांग ने बताया

कि मेरे मन में जब भी घर छोडऩे का विचार आया तो परिवार ने मुझे बहुत मारा।

फिर भी पवित्र भूमि पर लौटने की बहुत इच्छा है। वहीं एक विधवा ने अपने चार बच्चों को पीछे छोड़ दिया है,

जो करीब एक दशक पहले इजरायल में चले गए थे।

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