उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती में जमकर हुई धांधली, एक्शन में योगी सरकार

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लखनऊ। यूपी के परिषदीय विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में हुई धांधली पर पर्दा डालने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का नया कारनामा सामने आया है.

अपनी गर्दन फंसती देख अधिकारियों और कर्मचारियों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के कुछ जरुरी दस्तावेज जलाने की भी कोशिश की है. मूल्यांकन में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद शासन ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ सुत्ता सिंह को निलंबित कर दिया है.

इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में सम्पन्न हुई 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा में संज्ञान में आयी अनियमित्ताओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है. यह समिति दोषियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए सात दिन के अन्दर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

सुत्ता सिंह के निलंबन के बाद परीक्षा नियामक कार्यालय के पीछे शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेजों को जलाकर नष्ट करने का मामला सामने आया है. परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में स्कैन कापियां लेने पहुंचे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेजों को जलाया गया है.

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्होंने कापियों और अन्य जरुरी दस्तावेजों को जलाने से रोकने की कोशिश की तो उन्हें बाहर भगा दिया गया.

हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ अभ्यर्थी अधजले कागजात अपने साथ लेकर गए हैं. जिसे वे कोर्ट के समक्ष पेश भी करेंगे. कापियों के जलाने के वक्त अभ्यर्थियों ने मोबाइल के क्लिपिंग भी बनायी थी. जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेंजों और कापियों के जलाये जाने को लेकर जांच के आदेश दे दिए गए है

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