मेहनत करें लेकिन प्रयास के साथ

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अगर आपके पास अकल न हो, कोई बहुत बड़ा लक्ष्य न हो तो भी परिश्रम कर सकते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं, जो खूब मेहनत करते हैं लेकिन कोल्हू के बैल की तरह वहीं-वहीं घूम रहे हैंं। मेहनत तो बहुत की पर ठोस हाथ कुछ नहीं लगा। प्रयास का मतलब होता है सोचा-समझा परिश्रम। इसलिए अपने परिश्रम में कोशिश जरूर रखिए। बिना प्रयास के जो मेहनत करेंगे वह सिर्फ हम्माली होगी। जैसे ही चीज को कोशिश की शक्ल में लेंगे, आपको अक्ल भी लगाना पड़ेगी। अपनी योग्यता उसमें झोंकना पड़ेगी। जो केवल मेहनत से सफलता प्राप्त करते हैं वे सफलता का शोर भी मचाते हैं पर जिन्हें काेिशश करके कामयाबी मिली हो, वे सफलता पर हल्ला नहीं करते हुए कहते हैं हमें कामयाबी सरलता से मिल गई। अपने परिश्रम का ज्यादा प्रदर्शन मत करिए वरना अहंकार आ जाएगा। यदि आप कोशिश से कामयाब होते हैं हैं तो थोड़ी समझदारी से काम लेंगे और सफल होने पर लोगों को बताएंगे कि हमने सरलता से ही काम किया है। अहंकार साधारण भाषा में कहें तो गलतफहमी। और गलतफहमी जब अपने प्रति हो जाती है तो अच्छे-अच्छों की सफलता को धक्का लगने लगता है। तो सावधान रहिए, खूब मेहनत कीजिए लेकिन, कोशिश के साथ।

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