मोदी सरकार के चार साल पूरे, मगर महिला सुरक्षा का वादा पूरा नहीं

दिल्ली के निर्भया कांड के बाद आई जागरूकता, बदले कानून और सामाजिक पहल के बाद लगा कि जैसे महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी आएगी. लेकिन स्थिति ढाक के तीन पात जैसी ही है. सरकार बदली, लेकिन हालात नहीं बदले. महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई.

आज जब मोदी सरकार चार साल पूरे कर रही है तब पीछे देखने पर पता चलता है कि महिला सुरक्षा का उसका वादा पूरा नहीं हो सका. हालात ये है कि आज तो खुद बीजेपी नेताओं पर विपक्ष महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल होने का आरोप लगा रहा है और ये बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है.

शिमला, उन्नाव और कठुआ में हुए बलात्कारों के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. उन्नाव में तो बीजेपी विधायक का ही नाम सामने आया. उन्हें सूबे की पुलिस लाख बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन चौतरफा दबाव और सीबीआई जांच के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप और हत्या जैसे जघन्य आरोप लगे हैं.

निर्भया कांड के बाद रेप से जुड़े कानूनों को सख्त किया गया, इसके बावजूद देशभर में रेप के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे. कई राज्यों ने तो रेप के दोषियों के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान तक कर दिया गया है, लेकिन कानून सख्त करने के बावजूद रेप के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही. इस बात की गवाही नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े दे रहे हैं.

एनसीआरबी के मुताबिक, साल 2016 में देशभर में महिलाओं के साथ रेप के कुल 38947 मामले सामने आए, मतलब हर रोज औसतन 107 महिलाएं रेप का शिकार हुईं. साल 2015 की तुलना में साल 2016 में 12.4 फीसदी मामले बढ़े थे. साल 2013 में रेप के 33,707 मामले सामने आए थे, साल 2012 में 24,923 थे. इस तरह रेप के मामले बढ़ते गए.

साल 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 3,38,954 मामले सामने आए. यानी देशभर में रोज औसतन 928 महिलाएं किसी न किसी अपराध का शिकार हुईं. इन आंकड़ों की सबसे डरावनी तस्वीर यह है कि यौन शोषण का शिकार होने वालों में बच्चों का प्रतिशत काफी तेजी से बढ़ा है. हर रोज 290 बच्चे ट्रैफिकिंग, बाल विवाह, यौन शोषण के शिकार होते हैं.

12 साल से कम उम्र के बच्चों के वारदात की घटनाएं अधिक हैं. साल 2014 में बच्चों के साथ हुए अपराध के कुल 89,423 मामले दर्ज हुए थे, 2015 में ये नबंर 94,172 तक पहुंच गया. साल 2016 में इस आंकड़े ने 1 लाख भी पार कर लिया. इनमें भी पॉक्सो कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या 8904 से बढ़कर 35980 तक पहुंच गई थी.

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में सामने आया कि भारत में 15 साल से 19 साल की उम्र वाली 34 फीसदी विवाहित महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने अपने पति या साथी के हाथों शारीरिक या यौन हिंसा झेली हैं. 15 साल से 19 साल तक की उम्र वाली 77 फीसदी महिलाएं कम से कम एक बार अपने पति या साथी के द्वारा यौन संबंध बनाने या यौन हिंसा की शिकार हुई हैं.

यूपी के उन्नाव के एक गांव की पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके साथ 4 जून 2017 को बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर और उनके साथियों ने गैंगरेप था. विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. वह न्याय के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली, लेकिन कुछ नहीं हुआ. इसके बाद उसने मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह की कोशिश की थी.

इस मामले की शुरूआती जांच यूपी पुलिस ने की थी, जिस पर कई तरह के आरोप लगे. इसके बाद में चौतरफा दबाव पड़ने और पीड़िता के परिजनों की मांग पर इस केस को सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई ने केस दर्ज करते हुए आरोपी विधायक, उसके भाई सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इसमें शशि सिंह भी है, जो पीड़िता को विधायक के पास ले गई थी.

कठुआ गैंगरेप: दो समुदायों को लड़ाने के लिए वहशत?

 जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए गैंगरेप और मर्डर केस ने पूरे देश को दहला दिया है. क्या आम क्या खास हर किसी ने इस मामले में अपनी राय रखी थी. विवादों से बचने वाले बॉलीवुड सेलीब्रिटीज ने भी इस पर विरोध जताया था. इस मामले पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र से खुलासा हुआ था कि दो समुदायों को लड़ाने के लिए वहशत का खेल खेला गया था.

कश्मीर के बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, गैंगरेप और हत्या इलाके से अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी. इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान मंदिर के सेवादार को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पुलिस ने 15 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल करके यह खुलासा किया था.

शिमला गैंगरेप-मर्डर केस: छात्रा से हैवानियत की हद

पिछले साल 4 जुलाई को शिमला के पास कोटाखाई में एक मासूम बच्ची को अगवा करने के बाद उसके साथ हैवानियत की हद पार कर दी गई थी. उस मासूम बच्ची से न केवल गैंगरेप किया गया, बल्कि बर्बर तरीके से उसकी हत्या कर दी गई. इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश ही नहीं पूरे देश में लोगों ने प्रदर्शन किया था. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

पिछले दिनों सीबीआई ने 25 साल के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जो जंगलों में पेड़ काटने का काम करता है. आरोपी की पहचान अनिल उर्फ नीलू के रूप में की गई है. अनिल उर्फ नीलू मूलतः मंडी जिला के बरोट का रहने वाला है. शिमला में पेड़ काटने का काम करता था. कोटखाई जंगल में 7 जुलाई 2017 को 16 साल की गुड़िया का शव बरामद हुआ था.

रेप पर बीजेपी के बयान बहादुर नेताओं के बोल

– मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह यादव ने कहा था कि देश में पोर्न साइट्स की वजह से रेप के मामले बढ़ रहे हैं. इसलिए उन्होंने 25 पोर्न साइट्स को बंद करवा दिया है.

– जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने कहा था कि कठुआ रेप केस एक छोटी सी बात है. इसे ज्यादा तूल न दिया जाए.

– केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि इतने बड़े देश में रेप की एक-दो घटनाएं हो जाए तो बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए.

– BJP विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि नाबालिक लड़के-लड़कियों का स्मार्ट फोन इस्तेमाल करना गलत. लड़कियों को अकेले नहीं घूमना चाहिए.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...