म्यांमार के बौद्ध सन्यासियों पर फेसबुक प्रतिबंध का कोई असर नही

यांगून। सोशल मीडिया पर बौद्ध राष्ट्रवादियों के द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ घृणास्पद संदेशों को फैलाने के लिए उन पर यूएन की तरफ से फेसबुक के इस्तेमाल पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया गया था।
जिसके बाद म्यांमार के कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षुओं ने कहा है कि वे फेसबुक पर लगाए गए प्रतिबंधों का पालन नहीं करेंगे और सच बोलने के लिए इसका इस्तेमाल करते रहेंगे।

म्यांमार में रोहिंग्या मामले की जांच करने वाले संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा

कि फेसबुक अल्पसंख्यकों के खिलाफ प्रचार का स्रोत बन गया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, म्यांमार के राष्ट्रवादी भिक्षु और कार्यकर्ता जो हाल के वर्षों में वहां क

राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे हैं, वे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर हिंसक और

घृणास्पद संदेशों को साझा कर रहे हैं। म्यांमार के बौद्ध भिक्षुओं का कहना है कि

वे नए नाम के साथ फेसबुक पर अकाउंट बनायेंगे और सत्य के बारे में लिखना जारी रखेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के इस फैसले के बाद एक ईमेल संदेश में, फेसबुक ने बताया कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं।

इसके लिए हमारी वर्किंग टीम में इजाफा किया गया है जो

म्यांमार की तकनीकी चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगे।

कैलिफर्निया स्थित कंपनी ने कहा, हम इसके लिए उपकरणों में संभावित सुधार कर रहे हैं

जिसमें म्यांमार में भाषाओं से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

का इस्तेमाल किए जाने पर विचार किया जा रहा है।

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