यूपी में भाजपा को हराने सपा-बसपा ने मिलाया हाथ

लखनऊ। राजनीति की पाठशाला में ककहरा सिखाया जाता है कि राजनीति में कोई किसी का मित्र नहीं और कोई किसी का शत्रु नहीं होता। अब यह ककहरा फिर से उत्तरप्रदेश की राजनीति में दिखाई दे रहा है। यूपी की सियासी गलियों से खबर आ रही है कि कभी एक-दूसरे की धुर विरोधी रहीं सपा और बसपा सरकार अब एक हो रही हैं। उत्तरप्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा का साथ देने की बात कही है। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि मायावती के घर हुई एक बैठक में समर्थन पर चर्चा हुई।

लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन

सूत्रों का कहना है कि मायावती-अखिलेश यादव को समर्थन देने का जल्द ऐलान कर सकती हैं। इसके पहले सूबे में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा खाता नहीं खोल पाई थी, वहीं विधानसभा चुनावों में उसकी करारी हार हुई थी, जबकि समाजवादी पार्टी की भी दोनों चुनावों में शर्मनाक हार हुई थी। इस नए समीकरण को आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ एक महागठबंधन के तौर पर देखा जा रहा है, गोरखपुर और फूलपुर में 11 मार्च को मतदान होना है, जबकि नतीजे 14 मार्च को आएंगे।

…तो भाजपा को आएगा जोर

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को 28 प्रतिशत और बसपा को 22 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों को जोड़ लें तो ये 50 प्रतिशत वोट हो जाता है ऐसी स्थिति में बीजेपी के लिए उपचुनाव में सपा के प्रत्याशियों को हराना बेहद मुश्किल हो जाएगा। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटें योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं, दोनों नेता लोकसभा से इस्तीफा देकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बन चुके हैं।

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