रक्त संचार, खून जमने व हड्डियों में गैप की समस्या ठीक दूर करती है यूनानी कपिंग थैरेपी

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कई रोगों में कारगर यूनानी चिकित्सा की कपिंग थैरेपी दी जाती है।यह थैरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है। दुनिया के हर हिस्से में इस पद्धति का प्रयोग किया जा रहा है। इसे अरबी में हिजामा, अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण के नाम से जाना जाता है। हिजामा थैरेपी में शरीर से खून निकालकर बीमारी को दूर किया जाता है। ‘हिजामा’ एक अरबी शब्द है।

ऐसे होता है रक्तशोधन
कपिंग के लिए शीशे का कप यूज करके वैक्यूम पैदा किया जाता है, ताकि कप बॉडी से चिपक जाए। अब मशीन का यूज भी किया जाने लगा है। जिस पॉइंट पर बीमारी की पहचान होती है, वहीं पर कपिंग की जाती है।

दो तरह से हाेती है कपिंग
ड्राई कपिंग : हर्निया, हाईड्रोसिल, बवासीर, सियाटिका, आर्थराइटिस, नकसीर और जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए शरीर पर कांच के छोटे-छोटे कप लगाकर प्रेशर देते हैं जिससे रक्त संचार, खून जमने व हड्डियों में गैप की समस्या ठीक होती है। वैक्यूम खत्म होते ही कप अलग हो जाते हैं।

वेट कपिंग : माईग्रेन, अस्थमा व घुटनों के दर्द के इलाज के लिए शरीर पर छोटा चीरा लगाकर कपों से प्रेशर देकर दूषित रक्त बाहर निकालते हैं। गर्भवती महिलाएं व कैंसर पीड़ित यह इलाज ना लें।

इन बीमारियों में प्रभावी
माइग्रेन, जॉइंट पेन, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल डिस्क, पैरों में सूजन, सुन्ना होना और झनझनाहट, हर प्रकार का दर्द, सायटिका, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग धब्बे और गंजेपन जैसी समस्या का इलाज संभव है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी लाभकारी है लौकी

 

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