रबी फसल की बुवाई में लेटलतीफी का साया

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जयपुर। इस बार प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश तो कई इलाकों में मानसून की सुस्ती के चलते रबी फसलों की बुवाई में विलम्ब की आशंका जताई जा रही है। आमतौर पर सितंबर मध्य में की जाने वाली बुवाई अभी तक जोर नहीं पकड़ पाई है।

इसका एक कारण कृषि आदानों का टोटा पड़ जाने को भी माना जा रहा है। इससे रबी के उपज लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। गत वर्ष भी प्राकृतिक प्रकोप के कारण भारी मात्रा में रबी की फसलें चौपट हो गई थी जिनका मुआवजा अनेक जिलों के किसानों को अनियमितता के चलते कई महिनों के बाद मिला।

पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती एवं अन्य इलाकों में पिछले दिनों अतिवृष्टि से खेतों में पसरे पानी की निकासी समय पर नहीं हो पाने से रबी फसल की बुवाई इस बार निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो पाई है। इसी तरह जिन जिलों में सामान्य बारिश हुई वहां कृषि विभाग की ओर से उपज के लक्ष्य निर्धारण में लेटलतीफी के कारण तय समय पर रबी फसल नहीं बोई जा सकी है।

मौजूदा समय में रबी बुवाई की मंथर गति अब आने वाले दिनों में इसकी फसलों की बढ़वार में संकट पैदा कर सकती है। आमतौर पर दिसंबर से जनवरी अंत तक शीतलहर और इसके बाद मावठ की बारिश रबी फसल के लिए नुकसानदायक मानी जाती है, ऐसे में इसकी बुवाई में देरी के चलते इन फसलों पर संकट खड़ा हो सकता है।

खरीफ के खराबे के बाद अब रबी उपज लक्ष्य प्राप्त करने की चुनौती

सिंचाई के लिए पानी का संकट: कम बारिश वाले जिलों में कृषि योग्य पानी की समस्या किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई नहरों एवं जलाशयों की मरम्मत नहीं किए जाने से पहले से ही इनमें पानी का संग्रहण किया जाना जलसंसाधन विभाग के लिए चुनौती का कारण बना हुआ था। कई इलाकों में बांधों में पीने के लिए भी पर्याप्त जल की आवक नहीं हो पाई है ऐसे में इन क्षेत्रों में सिंचाई योग्य पानी की भी कमी महसूस की जा रही है।

दावों से दूर हकीकत: प्रदेश में रबी फसल की बुवाई को लेकर राज्य सरकार पर्याप्त आदानों की व्यवस्था का दावा कर रही है जबकि धरातल में हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। प्रदेश के कई जिलों में कृषि आदानों का जबरदस्त टोटा चल रहा है। इस कारण भी रबी की बुवाई प्रभावित हो रही है।

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