रहमतों की बारिश का माह है रमजान

जयपुर  महानगर संवाददाता @ महेन्द्र भौमिया। चांद के दीदार होने पर 17 मई से रमजान-उल-मुबारक का महीना शुरू होगा। यह रहमत और बरकत वाला का महीना है। उल्लेखनीय है कि हजरत याकूब के बारह बेटे थे। लेकिन वे हजरत युसुफ को सबसे ज्यादा मानते थे। युसुफ अल्लाह को भी बेहद महबूब थे।

उनकी दुआ से अल्लाह ने हजरत याकूब के 11 बेटों को ब श दिया था, उसी तरह रमजान-उल-मुबारक का महीना भी अल्लाह तआला के पास सबसे ज्यादा महबूब है। वो इस पाक महीने के सदके में 11 माह के गुनाह ब श देगा, बशर्त कि उसकी रजा हासिल करने के लिए इबादत और तिलावत की जाए। गुनाहों से तौबा की जाए।

झूठ, बुराई, चोरी, जिना से बचा जाए। इस्लामिक विद्वान सैफुल्लाह खां अस्दकी ने बताया कि बुराई से घिरी इस दुनिया में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। हर तरफ झूठ, मक्कारी, अश्लीलता और यौनाचार का बोलबाला हो चुका है। ऐसे में मानव जाति को संयम और आत्मनियंत्रण का संदेश देने वाले रोजे का महत्व और भी बढ़ गया है। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने, किसी की निंदा करने और हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना अनिवार्य है।

हाजी अनवर शाह के अनुसार रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना नहीं है बल्कि रोजे की रूह दरअसल आत्म संयम, नियंत्रण, अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने के संकल्प और उस पर मुस्तैदी से अमल में बसती है। अमूमन साल में 11 महीने तक इंसान दुनियादारी के झंझावातों में फंसा रहता है।

लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना आदर्श जीवनशैली के लिए तय किया है। रमजान का नेक मकसद साधन संपन्न लोगों को भी भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद का मूल्यांकन कर सुधार करने का मौका भी देता है।

बोहरा समाज का रमजान माह शुरू

बोहरा समाज का रमजान माह मंगलवार से शुरू हो गया। सुबह 4.30 बजे पहली सेहरी के साथ रोजे रखे गए। शाम को इ तार हुई। रात 12 से 1.30 बजे तक बोहरा समाज की मस्जिदों में विशेष नमाज पढ़ी गई। प्रतिदिन मस्जिदों में नमाज के साथ इबादत की जाएगी। नमाज को दौरान समाजजन कारोबार बंद रखेंगे। रमजान माह में 30 रोजे रखे जाएंगे। पूरा समाज खुदा की इबादत में लीन रहेगा।

रमजान माह में 17 वीं, 19 वीं और 21 वीं रातों को मगरिब और इशा की नमाज के बाद विशेष नमाज अदा की जाएगी। 19 तारीख को मौला अली मुश्किलकुशा की शहादत पर मस्जिदों और मरकजों पर वाअज होगी तथा बोहरा जमात द्वारा सभी मस्जिदों में रोजा इ तार की व्यवस्था की जाएगी। सभी जमातखानों में सामूहिक भोज होगा।

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