राजस्थान की इस पूर्व महारानी के निर्णय पर टिका है जैसलमेर की सियासत का भविष्य

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जैसलमेर। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिमी राजस्थान में आई सियासी गर्माहट के बाद राजनीतिक कयासों का दौर जारी है। इन कयासों को पूर्व महारानी रासेश्वरी राज्यलक्षमी के बंद सियासी पत्ते और बढ़ा रहे हैं। राजनीति में उतरने की मंशा जताने के बाद अब लोगों को बेसब्री से पूर्व महारानी के राजनीतिक निर्णय का इंतजार है।
वहीं, भाजपा और कांग्रेस भी पूर्व महारानी के निर्णय की तरफ नजरें गड़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक जैसलमेर के स्थापना दिवस 23 अगस्त को पूर्व महारानी राज्यलक्षमी द्वारा जैसलमेर विधानसभा से चुनाव लड़ने की मंशा जताने के बाद से जिले के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।
उन्होंने अभी तक यह निर्णय नहीं किया है कि वे भाजपा के साथ जुड़ेंगी या कांग्रेस के साथ। राजनीति में उतरने की मंशा के बाद से अब लोगों को उनके अगले निर्णय का इंतजार है।
दरअसल, पूर्व महारानी का फैसला यहां की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करेगी।
राज्यलक्षमी जिस दल के साथ जुड़ेंगी उसे मजबूती मिलेगी। पार्टी को जनता के रुझान का लाभ भी मिलेगा। जनकारी के मुताबित पूर्व महारानी के भाजपा का दामन थामने से बेहद लाभ मिलने की उम्मीद है।
भाजपा से नाराज चल रहा राजपूत समाज एकजुट होने की उम्मीद लगाई जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्र में भी भाजपा की स्थिति में काफी सुधार होगा।
वहीं, पूर्व महारानी के कांग्रेस का दामन थामने से पार्टी की राह आसान हो जाएगी। अब तक मुसलिम व मेघवाल कांग्रेस का परंपरागत वोट माने जाते हैं। लेकिन पूर्व महारानी से राजपूत वर्ग का भी जुड़ाव होगा।
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