राजस्थान: गुर्जर आरक्षण आंदोलन को लेकर रेलवे सतर्क

जयपुर. मंगलवार को बयाना में गुर्जर आरक्षण महापंचायत को देखते हुए सरकार ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को सोमवार शाम साढ़े पांच बजे सचिवालय में वार्ता के लिए बुलाया है। इससे पहले सोमवार की सुबह संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने गुर्जर समाज के पंच-पटेलों और समाज के प्रतिनिधियों की बैठक की इसमें सरकार से बातचीत के मुद्दे तय किए गए। आंदोलन के दौरान किसी भी तरह की विपरित स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने रेपिड एक्शन फोर्स (आरपीएफ) की छह कंपनियां मांगी है। इनमें तीन कंपनियां भरतुर संभाग में भेजी जा चुकी है। 2007 से शुरू हुई इस आंदोलन में अबतक 72 लोगों की जान जा चुकी है

– भरतपुर में बयाना के गांव अड्डा में 15 मई को गुर्जरों की महापंचायत को देखते हुए 30 मई तक भरतपुर जिले में धारा 144 लगा दी गई है।
– इसके अलावा जिले के पांच थाना क्षेत्रों के 102 गांवों में मोबाइल इंटरनेट सेवा 13 मई को शाम 4 बजे तक बंद कर दी गई हैं।
– गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के भी महापंचायत में आने पर रोक लगा दी गई है। भरतपुर की सीमा में घुसते ही उनकी गिरफ्तारी होगी। इस बीच, कलेक्टर-एसपी ने गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला से मुलाकात कर समझौते के लिए पहल की है।

आरपीएफ की कंपनियां पहुंची

– आरपीएफ की एक कंपनी को भरतपुर के बयाना, दूसरी कंपनी को हिंडौन व तीसरी कंपनी को भरतपुर शहर में तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम तक आरपीएफ की तीन और कंपनियां भरतपुर पहुंच जाएगी।

– इसी तरह, भरतपुर रेंज के पुलिस बल और पहले यहां तैनात रह चुके पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा आरएसी की एक दर्जन कंपनियां बुलाई गई है

-गौरतलब है कि पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज ने पिछले दिनों एक सभा की थी। इसके बाद गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 15 मई को बयाना के अड्डा गांव से गुर्जर आरक्षण आंदोलन शुरु करने का ऐलान किया था।
– यह आंदोलन किस रुप में होगा। बैंसला ने इसका खुलासा नहीं किया था। हालांकि किरोड़ी बैंसला ने प्रदेश के गुर्जरों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया था।

सरकार ने बैंसला व अन्य प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए जयपुर बुलाया

– मंगलवार, 15 मई से बयाना में गुर्जर आरक्षण महापंचायत और आंदोलन को देखते हुए सरकार ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को सोमवार शाम साढ़े पांच बजे सचिवालय में वार्ता के लिए बुलाया भेजा है।

सरकार अपना ट्रेंड बदले तब थमे आरक्षण आंदोलन की आग

– पिछले एक दशक से आरक्षण की मांग पर हर बार आंदोलन से गुर्जर समाज कम से कम 15 दिन पहले राज्य सरकार को अल्टीमेटम देता रहा है।
– अधिकांश मामलों में राज्य सरकार का ट्रेंड रहा है कि आंदोलन भड़कने के बाद ही गुर्जरों से समझौते किए गए। यही हाल इस बार भी है।
– अगर राज्य सरकारें अपना ट्रेंड बदलती तो अब तक हुए 72 लोगों की जान और डेढ़ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के आर्थिक नुकसान को बचाया जा सकता था।

गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला के मुताबिक, अभी तक राज्य सरकार की तरफ से कोई बात या पक्ष नहीं आया है। गुर्जर समाज आरक्षण की मांग पर आंदोलन शुरु करने जा रहा है। अब समाज के पास कोई विकल्प नहीं है। हालांकि राज्य सरकार के पास समाधान का विकल्प है।

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