रेप, मौत, विवादित बयान, सीबीआई जांच……लेकिन इंसानियत ?

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बलिया। उन्नाव रेप मामले में योगी सरकार की ओर तात्कालिक कार्रवाई की जो आशा की जा रही थी। वह धीमी गति में बदल गई। योगी सरकार के बोल अब फीके पड़ते नजर आ रहे हैं। बैकफुट पर दिख रही योगी सरकार के नेताओं ने तो अब हदे पार करना शुरू कर दिया हैं। जनता द्वारा चुने नेता जनता की भलाई के लिए काम करते नजर आने चाहिए। इसके स्थान पर बाहुबली राजनीति का संरक्षण करने में लगे हैं। योगी सरकार ने अब आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ रेप का केस दर्ज करने एवं सीबीआई जांच कराने का फैसला लिया हैं। वहीं बलिया के बैरिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने कुलदीप सिंह सेंगर के बचाव में विवादित बयान दिया है। सुरेंद्र सिंह का कहना है कि तीन बच्चों की मां के साथ कोई रेप करता है क्या? बीजेपी विधायक के इस बयान के बाद एक बार फिर यूपी सरकार की किरकिरी हुई है। सरकार को इस तरह के बयानबाजी वाले लोगों को अपनी पार्टी का बताते हुए शर्म से पानी-पानी हो जाना चाहिए। बीजेपी विधायकों को इस बात का लाइसेंस  मिल गया हैं कि उनकी सरकार हैं तो वे शर्म की हदे पार दे। जो नेता इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं वह जनता के कितने हमदर्द होंगे और उनकी सोच कितनी अच्छी होगी यह कहने की जरूरत नही हैं। लेकिन रेप मामले में मिडिया के अलावा दूसरे कितने लोग खड़े नजर आ रहे हैं। उस परिवार की स्थिती क्या होगी, जो लगातार अपराधियों के हाथों का खिलौना बनता जा रहा हैं। क्या मोदी या योगी सरकार इस तरह के बयानबाजी करने वाले नेताओं पर भी कोई कार्रवाई करेगी या चुपी साध लेगी। क्या इस तरह के बयानों पर कोई कार्रवाई नही होनी चाहिए? सरकार का इसमे क्या फर्ज बनता हैं?
सरकार के कदम:
सरकार ने पीडि़ता के पिता की मौत की जांच भी सीबीआई से कराने का फैसला किया है। ये फैसले मामले की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ( लखनऊ जोन) के अधीन गठित विशेष जांच टीम के सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद लिए गए। किसी व्यक्ति की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आती हैं। उस पोस्टमार्टम रिर्पोट में साफ जाहिर हो रहा हैं कि उसके पिता को कितनी यातनाएं देकर मारा गया होगा। किसी इंसान की हत्या के बाद उसका सीबीआई जांच ही होती रहेगी या हत्यारे को सजा कब कैसे और कितनी मिलेगी यह तो वक्त ही बताएगा।
सुनवाई आज:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी के पत्र पर राज्य सरकार से घटना पर उसका रुख पूछा और मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
पुलिस अधीक्षक के आवास पर सेंगर:
इस बीच, सेंगर बुधवार देर रात अचानक राजधानी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आवास के बाहर दिखे। खबर थी कि वह आत्मसमर्पण करेंगे लेकिन वह बिना आत्मसमर्पण के ही समर्थकों के साथ निकल लिए।
अमित शाह के दौरे का असर:
अमित शाह के लखनऊ पहुंचने के साथ ही घटनाक्रम शुरू हुआ। योगी सरकार ने उन्नाव जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों को निलंबित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। जेल अस्पताल के भी तीन डॉक्टरों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है जिन पर पीडि़ता के पिता के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप है। इसके साथ ही क्षेत्राधिकारी सफीपुर, कुंवर बहादुर सिंह भी लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिए गए हैं। शासन ने एसआईटी के साथ जेल डीआईजी और उन्नाव जिला प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी थी। एक साथ तीन रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने ये फैसले किए हैं। इसके साथ ही सरकार पीडि़ता के परिवार को सुरक्षा भी उपलब्ध कराएगी।

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