‘लाल किला’ ढहाया…पूर्वोत्तर में कमल का कमाल


अगरतला/कोहिमा/शिलॉन्ग। सियासी जगत में कभी उत्तर और पश्चिम भारत की पार्टी कही जाने वाली भाजपा ने सारे मिथकों और कयासों को धता बता दिया है। भाजपा ने 25 साल बाद ‘लाल किलेÓ को ढहाते हुए पहली बार सत्ता हासिल कर ली है। इसी के साथ ही भाजपा ने साबित कर दिया है कि वह पैन इंडिया यानी पूरे देश की पार्टी है। बंगाली भाषी लोगों के इस राज्य में 1993 के बाद से ही सीपीएम की सरकार थी। लेकिन, पश्चिम बंगाल में दीदी यानी ममता बनर्जी और त्रिपुरा में भाजपा के चलते लेफ्ट को सत्ता से लेफ्ट होना पड़ा है। कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में मशहूर कांग्रेस का तो यहां से सफाया ही हो गया है। पूर्वोत्तर के असम में पहली बार सरकार बनाने वाली भाजपा के बारे में यह आकलन किसी ने भी नहीं लगाया था कि वह त्रिपुरा में अभी अपना परचम लहराएगी। सियासी जगत के पंडित भी भाजपा की इस जीत से चौंक गए हैं। क्योंकि, वर्ष 2013 में भाजपा को सिर्फ 1.5 फीसदी वोट ही मिल पाए थे। वहीं नगालैंड में भाजपा अपनी सहयोगी के साथ सरकार बनाती दिख रही है। मेघालय में 10 वर्षों से सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए इस बार के चुनाव मनमाफिक परिणाम नहीं ला पाए। मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा दिखाई दे रही है।

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