लो कर्नाटक भी हुआ कांग्रेस मुक़्त…खिला कमल

– कर्नाटक से दक्षिण में फिर छाई भाजपा, शुरुआती रुझानों में भाजपा को 121 सीटें मिलने का अनुमान…जनता ने दिया पूर्ण बहुमत

– 2.5 फीसदी आबादी पर ही सिमटा कांग्रेस का जनाधार, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी हुई हिट

– सिद्दरमैया सरकार को तगड़ा झटका…अंतिम चुनाव लडऩे वाले सिद्दरमैया का राजनीतिक कॅरियर हुआ बेपटरी

बेंगलूरु। आखिर कर्नाटक में भी भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का जादू चल गया है। लिंगायत बहुल राज्य में भी अब भगवा रंग चढ़ गया है। यानी अब कर्नाटक के रास्ते भाजपा दक्षिण में भी अपने कदम मजबूती से बढ़ा रही है। शुरुआती रुझानों में कर्नाटक में भाजपा को 121 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है।

यानी जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया है। वहीं सिद्दरमैया की अगुवाई में फिर से चुनाव लडऩे वाली कांग्रेस का जनाधार यहां से भी खिसक गया है और वह फिलहाल 60 सीटों पर सिमटती दिखाई दे रही है। चुनाव से पहले जेडीएस की सरकार बनाने में भूमिका की बात हो रही थी, वह भी फिलहाल निराधार साबित हो रही है। हालांकि, रुझानों में उसे 41 सीटें मिलती दिख रही हैं। लेकिन, भाजपा को पूर्ण बहुमत की स्थिति में उसे भी सत्ता से बाहर ही रहना पड़ेगा। वहीं अन्य फिलहाल दो सीटों पर बढ़त लिए हुए है।

भाजपा की संसदीय दल की बैठक 6 बजे

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज शाम तीन बजे प्रेस कांफ्रेंस को सम्बोधित करेंगे। वहीं शाम 6 बजे पार्टी की संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार येद्दियूरप्पा भी शाम को दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उपस्थित रहेंगे।

जश्न में डूबे भाजपा कार्यकर्ता

कर्नाटक में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के शुरुआती रुझानों के बाद देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। देश के विभिन्न राज्यों में कार्यकर्ता जीत का जोरदार जश्न मना रहे हैं। कार्यकर्ता आतिशबाजी कर रहे हैं, ढोल-नगाड़े बजा रहे हैं। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा करा रहे हैं। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भी कर्नाटक की जीत का जश्न मनाया जा रहा है। मुख्यालय में रविन्द्र प्रसाद, निर्मला सीतारमण्र, संबित पात्रा सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे का मुंह मीठा करा खुशी मना रहे हैं।

सिद्दरमैया दोनों सीटों पर पीछे

इन चुनावों में दोनों ही पार्टियों ने जातिगत कार्ड खेला था। दोनों ही पार्टियों ने लिंगायत समाज पर पूरा फोकस किया था। पीएम नरेन्द्र मोदी ने तो विदेश में लिंगायत संत की पूजा भी की थी। दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने लिंगायत मंदिरों के खूब चक्कर लगाए थे। चुनावी प्रचार में सिद्दरमैया ने अमित शाह के लिए कहा था कि वे हिन्दू नहीं हैं, वे तो जैन हैं। उन्होंने स्वयं को लिंगायत ही बताया था, लेकिन, लगता है कि जनता ऐसा नहीं मानती। इसलिए जनता ने उन्हें दोनों ही सीटों पर नकार दिया है। फिलहाल सिद्दरमैया दोनों सीटों से ही पीछे चल रहे हैं।

इस चुनावी जीत के क्या है मायने

कर्नाटक में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का साफ संकेत है कि देश ने नोटबंदी
और जीएसटी को बुरा नहीं माना है। युवाओं में भी मोदी की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। पूरे देश का भरोसा मोदी पर कायम है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी मोदी की राह कुछ आसान हो गई। क्योंकि, कर्नाटक में उसका जनाधार बढऩे का फायदा आगामी लोकसभा चुनावों में भी मिलेगा। भाजपा ने 21वें राज्य में अपना झंडा बुलंद किया है।

तीन राज्यों में सिमटी कांग्रेस, कांग्रेस मुक्त भारत की ओर भाजपा

इस हार के साथ ही कांग्रेस का देशभर में जनाधार 2.5 फीसदी आबादी पर ही रह गया है। वहीं इससे पहले के हुए राज्यों के चुनावों में भी राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को हर जगह करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद कांग्रेस अब सिर्फ तीन राज्यों में ही सिमटकर रह गई है।

इनमें पंजाब, मिजोरम और पुड्डुचेरी है। कांग्रेस के लिए हो रही लगातार हार के बाद चिंतन करने के अलावा ज्यादा कुछ है नहीं। अब कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों में क्या रणनीति अपनाएगा…यह देखने वाली बात होगी।

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