वर्षों से नारकीय जीवन जी रहे लोगों के दिन फिरेंगे

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महानगर संवाददाता
जंगलात में बसी जवाहर नगर कच्ची बस्ती होगी हाईटेक, सर्वे का कार्य शुरू, बनेंगे 50 वर्ग गज के फ्लैट्स
जयपुर। जवाहर नगर कच्ची बस्ती को यथास्थान पर बसाए जाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी। अब यहां आने वाले दिनों में बस्ती नहीं बल्कि यहां वर्षों से अव्यवस्थाओं में नारकीय जीवन जी रहे लोगों को आरामदायक जिंदगी नसीब हो सकेगी। अब यह बस्ती हाईटेक होगी।

हाईटेक बनाई जाने वाली इस बस्ती के लोगों को कच्चे मकानों की जगह शीघ्र ही 50-50 वर्ग गज के फ्लैट्स मिलेंगे। यह निर्णय अभी हाल ही में जेडीसी वैभव गालरिया, स्थानीय विधायक अशोक परनामी, गंदी बस्ती सुधार समिति चेयरमैन तथा वार्ड 62 की पार्षद संतरा वर्मा और समन्वय समिति की बैठक में लिया गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बस्ती को यथास्थान पर बसाए जाने के सिर्फ कागजों में ही आदेश थे। 1981 की बाढ़ के प्रभावित लोगों को झालाना, मुरलीपुरा, ऋषि गालव नगर में बसाया था। यह बस्ती बाढ़ में प्रभावित लोगों में से शेष रहे परिवारों की है। जो 1981 से ही इसे यथा स्थान पर बसाए जाने की मांग कर रहे हैं।

बस्ती में 1981 के बाद दो सर्वे हुए हैं पहला सर्वे 1994-95 में और दूसरा सर्वे 2010-11 में हुआ। सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहे लोगों को सर्वे की पर्ची तक नहीं मिली। लेकिन अब जेडीसी के साथ बैठक और जिस तरह से सर्वे का कार्य किया जा रहा है उसे देखते हुए अब स्थानीय निवासियों को आशा की किरण दिखने लगी है। समन्वय समिति के सदस्य चैनसिंह शेखावत और जगदीश वर्मा ने बताया कि जेडीए ने इस बस्ती के सर्वे का कार्य याशी कंसल्टेंसी प्रा. लि. को सौंपा है। सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद कितने फ्लैट बनाए जाएं यह तय कर इस जमीन को वन विभाग से जेडीए के नाम ट्रांसफर करवाया जाएगा।
आखिर काठ की हांडी कब तक
बस्ती के लोगों का कहना है कि जवाहर नगर को यथास्थान पर सुनियोजित बसाए जाने को लेकर जवाहर नगर विकास सेवा समिति भी 1990 से लगातार प्रयास कर रही है। पूर्व में जौहरी बाजार विधानसभा क्षेत्र के विधायक कालीचरण सराफ जो 1985 से लगातार पांच बार जीते उनसे भी कॉलोनी को यथा स्थान बसाए जाने की लोगों ने मांग की। दो बार विधायक अशोक परनामी ने भी इस बस्ती को यथास्थान सुनियोजित बसाने की बात की। अब चुनाव नजदीक हैं जिसे देखते हुए बस्ती में हो रहा सर्वे अगर वाकई में चुनावी रणनीति ही रहा तो यह गरीबों के साथ छलावा ही होगा। उनका कहना है कि काठ की हांडी एक बार चढ़ती है बार-बार नहीं।
बस्ती को यथा स्थान पर बसाने के लिए जेडीसी, स्थानीय विधायक समन्वय समिति की इस तरह की यह पहली बैठक रही। जिसमें यह तय किया कि बस्ती का सर्वे करवाकर लोगों को 50 वर्ग गज के फ्लैट दिए जाएंगे। वहीं जो जगह खाली रहेगी उसमें सामुदायिक भवन, लाइब्रेरी, पार्क, चिकित्सालय जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह बैठक काफी हद तक सफल रही।
संतरा वर्मा, चेयरमैन, गंदी बस्ती सुधार समिति।

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