वसुंधरा सरकार ने लिखित में दिया प्रस्ताव, इन 13 बिंदुओं पर जताई सहमति

13 बिंदुओं वाला प्रस्ताव जो गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों को सौंपा है इसमें कुछ खास नया नहीं। अधिकतर काम वही गिनाए गए हैं जो पिछले दिनों सरकार ने गुर्जर सहित पांच जातियों के लिए शुरू किए थे और जो भविष्य में पूरे किए जाएंगे। हालाकि एक बिंदु इस प्रस्ताव में बिल्कुल नया है। जिसमें केन्द्र सरकार द्वारा गठित जस्टिस रोहिणी आयोग का जिक्र है।

गुर्जरों की मांग थी कि सरकार आरक्षण के फॉर्मूले पर बात करे लेकिन इस पर कोई भी कदम सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है। सोमवार देर रात तक जो वार्ता चली उसके बाद गुर्जर नेताओं ने कहा कि सरकार ने जो कहा है उस पर चर्चा पीलूपुरा में होने वाली महपंचायत में होगी। इसके बाद ही आगे के निर्णय पर विचार होगा।

यह है गुर्जरों की मांगे

  • गुर्जरों की मुख्य मांग ओबीसी को वृगीक्रत कर पांच प्रतिशत कोटा तय किया जाए। इस पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया।
  • गुर्जरों की शिकायत कि उन्हें एक प्रतिशत आरक्षण भी वास्तव में नहीं मिल रहा। शिक्षा विभाग, आरएएस व जेईएन भर्ती में एक प्रतिशत आरक्षण ठीक से नहीं मिला।
  • गुर्जरों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि वे ही मामले लम्बित है, जो उन धाराओं से जुड़े हैं जिनमें मामले वापस नहीं लिए जा सकते। ऐसे करीब 35 मामले बताए जा रहे हैं।

ये हैं वो 13 बिन्दू जो लिखित समझौते के प्रस्ताव में दिए गए हैं

  1. 9 दिसम्बर 2016 से पूर्व प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग को 5 प्रतिशत आरक्षण देय था। लेकिन माननीय उच्च न्यायालट ने इस विधेयक को रद्द कर दिया। इस दौरान 9.1.16 से 21.12.17 तक जो भी भर्तियां निकली उनमें सरकार 1 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सैद्धांतिक सहमति व्यक्त करती है। इसके लिए आवश्यक छाया पदों का सृजन भी किया जाएगा।
  2. -कोर्ट के निर्देशानुसार 1252 पदों पर नियुक्तियां की गई थी। जिनमें से 102 पदों पर अभ्यर्थियों ने पद ग्रहण नहीं किया। इसमें जो पद रिक्त हैं, उनकी प्रतीक्षा सूची को क्रियान्वित किया जाएगा।
  3. राज्य सरकार अति पिछड़ा वर्ग को दिए आरक्षण के रोस्टर की निश्चित तौर पर पालना करेगी। चूंकि विशेष पिछड़ा वर्ग विधेयक, 2015 के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की एसएलपी लम्बित है। इस पर निर्णय पक्ष में आता है तो भूतलक्षी प्रभाव से 4 प्रतिशत पदों का सृजन किया जाएगा और साथ ही इन पदों को एसएलपी के निर्णयाधीन आरक्षित रखा जाएगा।
  4. देव नारायण योजना पर पूर्ववर्ती सरकार ने 276 करोड़ खर्च किए, वर्तमान सरकार 1000 करोड़ रुपए व्यय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  5. देव नारायण गुरूकुल योजना के तहत आवासी विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को 3 विद्यालयों का विकल्प दिया जाएगा। साथ ही प्रवेश तिथि भी संभवत 31 मई तक हो, सुनिश्चित किया जाएगा।
  6. देव नारायण गुरूकुल योजना के तहत छात्रवृति भी अक्टूबर माह में दिलाये जाने का प्रावधान किया जाएगा।
  7. देव नारायण योजना के अन्दर धौलपुर, अलवर और झुंझुनू जिले में प्रवेश परीक्षा में हो रही धांधली को रोकने के लिए उच्च अधिकारियों की उपस्थिती में परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  8. देव नारायण योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को देय स्कूटी का वितरण संभवतः 15 अगस्त तक किया जाएगा
  9. भैरोसिंह शेखावत अन्त्योदय योजना में 4 प्रतिशत ब्याज पर ऋण अति पिछड़ा वर्ग के नौजवानों को दिया जाएगा।
  10. देव नारायण योजना के तहत 10 आवासीय विद्यालय, 15 देव नारायाण छात्रावास, देवलोक में स्टेडियम और 10 पीएचसी खोलने पर भी सहमत है।
  11. पूर्व में दर्ज अपराधिक मुकदमों का निस्तारण समय पर हो तथा जिन मुकदमों में न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर दिया गया है, उन्हें वापिस लेने हेतु अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह की अध्यक्षता में बनी कमेटी 4 जिला कलैक्टर, पुलिस अधीक्षक और सम्भागीय आयुक्त की बैठक बुला कर क्रियान्वित करेंगी।
  12. ऐसी भर्तीयां जिनके मूल विज्ञापन में विशेष पिछड़ा वर्ग के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था वे भर्तियां जो वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं, यथा आरएएस-2016, सैकण्ड ग्रेड अध्यापक परीक्षा-2016 में एमबीसी वर्ग के तहत 1 प्रतिशत आरक्षण लाभ देते हुए भर्ती प्रक्रिया हेतु वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।
  13. केन्द्र सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्गीकरण के विषय को तय करने के लिए न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग का गठन किया गया है, जो शीघ्र अपनी रिपोर्ट देगा। रोहिणी आयोग द्वारा 4 जून, 2018 को राजस्थान समेत एमपी, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड और उत्तरप्रदेश को आमंत्रित भी किया गया है। रोहिणी आयोग द्वारा अत्यंत पिछड़ा वर्ग के सम्बन्ध में दी जाने वाली रिपोर्ट पर केन्द्र सरकार द्वारा किए जाने वाले निर्णय के सम्बन्ध में राज्य सरकार तत्समय निर्णय सुनिश्चित करेगी।

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