वासुदेव देवनानी को नहीं पता कला शिक्षा ऐच्छिक है या अनिवार्य

जयपुर। प्रदेश के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी अपने ही महकमे से बेखबर हैं।

दरअसल, साल 1995 से कक्षा 1 से 10 तक कला शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है।

आरटीआई में भी ये बात साफ हो गई। लेकिन सूबे के शिक्षा मंत्री इससे इत्तेफाक नहीं रखते।

वो तो कला शिक्षा को आंशिक और ऐच्छिक विषय माने बैठे हैं।

यही नहीं उनका तो ये तक कहना है कि कला शिक्षा को बीए-बीएड किए हुए शिक्षकों से पढ़वाया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कला शिक्षकों की भर्तियों को लेकर कहा कि फिलहाल

दूसरे विषयों में भर्तियां की जा रही हैं। आवश्यकता पड़ी तो कला शिक्षकों की भी भर्ती की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ये तो भूले ही कि कला​ शिक्षा अनिवार्य विषय है। साथ ही वो ये भी भूल गए कि शिक्षा

के अधिकार अधिनियम 2009 में कला शिक्षा के ​लिए शिक्षक भी अनिवार्य किए गए हैं।

इतना ही नहीं​ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की ओर से कक्षा 1 से 10 तक की कला
शिक्षा की किताबें तक प्रकाशित की जाती है। जो वितरण के अभाव में रद्दी बनकर गोदामों में पड़ी हैं।
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