वो फ़्लू जिसने करोड़ों लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया

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स्पेनिश फ़्लू महामारी से बचे हुए लोगों के पत्र बताते हैं कि 1918-1919 में ब्रिटेन पर डर और अराजकता का अंधेरा छा गया था. ये पत्र समझने में मदद करते हैं कि किसी घातक बीमारी के साये में रहना क्या होता है.

लंदन में इंपीरियल वॉर संग्रहालय में दस्तावेजों की जांच कर रही रिसर्चर हेन्ना मोडस्ली इन पत्रों के संग्रह को ‘महामारी के इंसानी अनुभवों’ की खिड़की कहती हैं. इस महामारी ने ब्रिटेन में ढाई लाख लोगों की जान ले ली थी और दुनिया भर के 5-10 करोड़ लोगों ने इसकी चपेट में आकर जान गंवाई थी.

इतिहासकार और पत्रकार रिचर्ड कोलियर ने इन पत्रों को संग्रहालय में दिया था. 1700 सच्ची कहानियों का ये संग्रह 1970 के दशक में बनाया गया था. ये उन लोगों की दास्तां हैं जिन्होंने पहली बार महामारी देखी थी.

उनमें से एक कोवेन्ट्री की नौ वर्षीय लड़की की यादें भी हैं जिसने दो दिन के अंतराल में अपनी 35 साल की मां और सात साल की छोटी बहन को खो दिया था. इस लड़की ने बीमारी के प्रभाव के बारे में 1970 के दशक में कोलियर को लिख कर भेजा था.

उन्होंने लिखा था, “11 नवंबर, 1918 को दो-दो अंतिम संस्कार वाला दिन मेरे लिए बहुत चौंकाने वाला था. ये वही दिन था जब पहला विश्व युद्ध खत्म हुआ था.”

“मुझे याद है जब अंतिम यात्रा चर्च की ओर जा रही थी. हर जगह घंटियां, सायरन और जश्न की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं, लेकिन जब लोग हमारी अंतिम यात्रा को देखते तो चुप हो जाते थे.”

“यह वास्तव में एक भयानक पल था, हम नहीं जानते थे कि हम में से अगला कौन मरने वाला है.”

 

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