जयपुर। नए वर्ष के आगाज के साथ शहरी निकायों की सड़कों की मरम्मत एवं पुनरूद्धार कार्य शुरू करने के नगरीय विकास विभाग की तैयारियों पर बजरी का संकट और आचार संहिता का साया मंडराने लगा है। इसे लेकर प्रदेश भर के नगरीय निकायों में व्यापक कार्य योजना बनाई गई थी और अक्टूबर 2018 तक सड़कों के मेंटिनेंस का कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया था।
वर्ष 2017-18 के बजट में राज्य के 191 स्थानीय निकाय क्षेत्रों में 1000 करोड़ रुपए के सड़क निर्माण एवं पुनरूद्धार कार्य करवाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद सड़कों की सुध लेने की कवायद शुरू कर दी गई लेकिन बीच में ही इसमें व्यावधान आ गया। तत्पश्चात जनवरी माह में नए वर्ष के आगाज के साथ नगरीय क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत कार्य बड़े स्तर पर शुरू करने का निर्णय लिया गया। क्षतिग्रस्त एवं खराब सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत कार्य करवाए जाने के लिए बकायदा समस्त नगरीय निकायों की ओर से तैयार तकनीकी अनुमान के आधार पर निविदाएं आमंत्रित करने की कार्यवाही भी की गई। निविदाओं की औपचारिकता पूरी होने के बाद विभिन्न शहरों के वाशिंदों में सड़कों की कायाकल्प होने की उम्मीद बंधी थी लेकिन इस कार्य में बजरी का संकट और उपचुनावों को लेकर लागू आचार संहिता के कारण एक बार फिर व्यावधान आ गया है।
यह है सड़कों के हाल
प्रदेश के बड़े शहरों से लेकर छोटे एवं सुदूरवर्ती इलाकों की सड़कों छोटे-मोटे मेंटिनेंस कार्य के अलावा लंबे समय से कोई सुध नहीं ली जा रही है। करीब चार माह पूर्व मानसून की बारिश के बाद कई शहरों की सड़कों को व्यापक नुकसान हुआ था इसके बाद पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाली सड़कों की तो मरम्मत करवा दी गई लेकिन नगरीय निकाय के क्षेत्राधीन आने वाली सड़कों का जीर्णोद्धार कार्य चुनिंदा शहरों में ही शुरू हो पाया।

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