शूरवीर का ये कैसा सम्मान?

योगेश शर्मा
महाराणा के ‘प्रताप’ को भूली सरकार, भाला नहीं अब बांस की छड़ी कर रही है भाले का काम
जयपुर। वीरता, शौर्य और साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप ने चाहे युद्ध में अपने 81 किलो वजनी भाले से दुश्मनों के दांत खट्टे किए हों लेकिन अब यह भाला सरकारी उदासीनता के चलते भोंटा साबित हो रहा है। प्रताप के प्रतीक का यह हाल प्रतापनगर स्थित हल्दीघाटी मार्ग पर महाराणा प्रताप सर्किल पर देखने को मिला। महाराणा प्रताप का यह स्टेच्यु राजधानी में सिर्फ अकेला है। स्थिति यह है कि इस प्रतिमा पर उद्घाटन के दौरान भाला लगा हुआ था जिसे समाजकंटकों ने करीब 8 साल पहले तोड़ दिया और अब प्रताप के भाले के स्थान पर यहां से गुजरने वाले लोगों को सिर्फ बांस की छड़ी ही दिखाई देती है। लेकिन इस तरफ न तो आवासन मंडल ध्यान दे रहा है और ने राज्य सरकार, जिसके चलते सर्किल पर अव्यवस्थाओं का आलम बना हुआ है। पूर्व में लगाई गई लाइटें और विद्युत बॉक्स पूरी तरह से गल चुके हैं यहां किसी तरह की सारसंभाल नहीं हो रही है, इसके चलते यह मूर्ति मानो वीरान लगने लगी है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि उदयपुर में तो सरकार लोगों को महाराणा प्रताप की एक झलक दिखलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है, वहीं जयपुर में प्रतिमा की सार-संभाल के लिए गत आठ साल में फूटी कौड़ी तक खर्च नहीं कर पाई। और तो और मूर्ति स्थापित करने के बाद तो यहां एक दो कार्यक्रम हुए लेकिन बाद में अब तक सरकार और आवासन मंडल की ओर से महाराणा प्रताप जयंती पर एक भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। जयंती पर सिर्फ सामाजिक संस्थाओं की ओर से छोटे-छोटे कार्यक्रम ही आयोजित होते हैं। बड़े स्तर पर अब कोई कार्यक्रम नहीं होते हैं और न ही इसकी कोई देखरेख हो रही है।
बजरंग दल के प्रान्त संयोजक अशोक सिंह राजावत और प्रताप नगर युवा विकास समिति अध्यक्ष विजय साहू ने बताया कि 25 अक्टूबर 2007 में नगरीय विकास, आवाासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री प्रताप सिंघवी के मुख्य आतिथ्य और राजस्थान मंडल अध्यक्ष सरदार अजयपाल सिंह की अध्यक्षता में इस मूर्ति की स्थापना की। इसके बाद एक-दो बार सरकारी स्तर पर आयोजन हुए लेकिन अब इस तरफ कोई सा विभाग सुध नहीं ले रहा है। गत 8 साल से प्रताप का भाला गायब है। इसको यहां की सामाजिक संस्थाएं प्रतापनगर विकास समिति, प्रतापनगर युवा विकास समिति, वैलफेयर सोसायटी, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंगदल, करणी सेना सहित दर्जनों सामाजिक संगठानों की ओर से धरने दिए और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिए लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि राजधानी में यह सिर्फ एकमात्र प्रतिमा है जिसकी सार-संभाल में भी सरकार एक भी पैसा खर्च नहीं कर पा रही है। प्रतिमा पूरी तरह से आवासन मंडल और सरकार की अनदेखी के चलते उपेक्षित है।

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