शौक में शुरु किया नशा आदत में हो जाता है शुमार

0
39

विशेष सवांददाता
प्रकाश सिंह चौहान.

प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल के नशामुक्ति वार्ड से लाइव रिपोर्ट…

जयपुर। कहते है कि नशा कोई भी हो, अगर एक बार इसकी आदत लग जाए तो छुड़ानी मुश्किल हो जाती है। कई बार तो नशा करने वाले व्यक्ति इतना एग्रेसिव हो जाता है कि वो छत से कूद जाता है या फिर अपना सिर दीवार और जमीन पर पटकने लगता है। उसे अपनी जान की भी परवाह नहीं होती है। उसे तो बस उस वक्त वो नशा चाहिए होता है जिसकी उसे तलब है। लेकिन इन्हीं में से कुछ ऐसे दृढ़ इच्छा शक्ति वाले लोग भी होते है जो अपनी इन बुरी आदतों को छोडऩा चाहते है।

– नशामुक्ति वार्ड में भर्ती मरीजों ने कहा नशे का कहो न, ये बर्बाद कर देता है जीवन
– स्मैक, चरस, गांजा, डोडा-पोस्त के मरीज करा इलाज

केस : 1
नाम : विकास (बदला हुआ नाम) उम्र महज 23 साल। कोटपूतली का रहने वाला है। स्नातक की पढ़ाई करने के बाद सपना था गारमेंट का बड़ा बिजनसमैन बने, लेकिन बुरे दोस्तों की संगत में ऐसा पड़ा की रोज एक बोतल शराब पीने लगा। पिछले तीन साल में हालत ये हो गई कि शरीर ने जवानी में जवाब दे दिया। पिछले दस दिनों से एसएमएस अस्पताल के नशामुक्ति वार्ड में भर्ती है। विकास बोलता है कि अब बहुत हो गया। नशे को पूरी तरह से छोडऩे का संकल्प लेकर यहां आया है। अपना सपना पूरा करेगा और एक सफल बिजनेसमैन बनेगा।

केस : 2
नाम : हीरा लाल सोनी (बदला हुआ नाम) महेन्द्रगढ़ के रहने वाले है। वह बताते है कि पिछले 15 साल से डोडा-पोस्त का नशे का आदि है। सोनी कहता है जिन्होंने नशे की लत लगाई वो तो मर गए और मुझे मरने के लिए छोड़ गए। बीते वर्षो में इतना नशा किया कि अब शरीर जवाब देने लगा है। रातों को नींद नहीं आती, भूख तो जैसे गायब ही हो गई है और बैचेनी बनी रहती है। अब अपने बच्चों और परिवार के लिए जीना चाहता हूं।

केस : 3
नाम : सलीम खान (बदला हुआ नाम) 27 साल का युवा। जयपुर शहर का रहने वाला है। सलीम बताता है कि जब कक्षा बारहवीं में प्रथम श्रेणी में पास हुआ तो घरवालों को मुझ पर गर्व हुआ था। वो कहते थे कि ये प्रतियोगी परीक्षा देकर अफसर बनेगा। लेकिन गलत दोस्तों की संगत में ऐसा पड़ा कि अपने लक्ष्य भूल गया और नशा करने लगा। वह पिछले तीन साल से लगातार स्मैक, चरस, गांजे का नशा कर रहा है। हालत ये है कि खुद अपने आप चलने-फिरने से भी लाचार हो चुका है। शरीर ने जब साथ देना छोड़ा और जब दूसरो पर आश्रित हुआ तो लगा कि नशा को छोडऩा है।

एफआईआर होने के बाद फरार चल रहे अलोक नाथ मीडिया से हुए रूबरू

 

ये महज तीन केस ही नहीं है। ऐसे न जाने कितने युवा है जो गलत संगत में पडक़र नशे के आदि हो जाते है और अपना लक्ष्य को भूल जाते है। नशे की तलब जब इन पर हावी होती है तो ये चोरी जैसे अनैतिक काम करने से भी

नहीं झिझकते है। वाई मानसिंह अस्पता में ये लोग अपना इलाज करवा रहे है। नशामुक्ति वार्ड के सीनियर डॉ नीरज गर्ग बताते है कि नशे को छोडऩे के लिए एसएमएस में कई मरीज आते है। जिनमें से 70 फीसदी युवा है। वे बताते है कि 30 से 40 फीसदी स्मैक, अफीम, डोडा-पोस्त, 50 फीसदी एल्कोहल और 10 फीसदी इंजेक्शन, गांजा, भांग, गोलियां का सेवन करने वाले है।

मरीजों की करते है काउंसलिंग
डॉ. गर्ग बताते है कि अधिकांश मरीज नशामुक्ति केन्द्र की ओपीडी में आते है, जहां से उन्हें दवा दी जाती है। लेकिन नशामुक्ति वॉर्ड में वे मरीज आते है। जो खुद नशा से निजात पाना चाहते है या फिर उसके परिजन उसे यहां लेकर आते है। यहां आने के बाद मरीज की काउंसलिंग की जाती है। जिसमें यह जानने की कोशिश की जाती है कि मरीज मानसिक कारण से नशा करता है कि उसे नशे के कारण मानसिक तकलीफ है।

इन सोसाइटी के लोग अधिक करते है नशा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के इकाई प्रभारी एवं वरिष्ठ आचार्य डॉ. परमजीत सिंह बताते है कि हाई सोसाइटी और लोअर सोसाइटी के लोग अधिक नशे के आदि होते है। खानाबदोश, झुग्गी-झोपडिय़ों या बस्ती में रहने वाले सस्ता नशा करते है। ये लोग पेट्रोल, थीनर, व्हाट्नर, पंचर बनाने की ट्यूब का उपयोग करते है। जो कि इन्हें आसानी से उपलब्ध हो जाती है। जबकि हाई सोसाइटी के लोग महंगा नशे के आदि होते है। आजकल लड़कियां और महिलाएं भी ड्रिंक, स्मोकिंग करती है। इनका ऐसा मानना होता है कि अगर ये अपने साथियों के साथ नशा नहीं करेगें तो इन्हें वह आउटकास्ट समझे जाएंगे। पिछले दिनों ओपीडी में 13 से 19 साल की उम्र बच्चों के केस आए है जो नशे के आदी है।

पिंकसिटी को अपराध मुक्त बनाने पर रहेगा फोकस,पुलिस आयुक्त दित्तीय अजयपाल लांबा से खास मुलाकात

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...