सऊदी समर्थित सेना ने हुदायदा बंदरगाह पर किया हमला

अल हुदायदा (यमन)। तमाम चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए हुउटी विद्रोहियों ने अपने कदम पीछे नहीं किए। वापस जाने की समय सीमा भी निकल गई।
ऐसे में सऊदी समर्थित सेनाओं ने हुदायदा के प्रमुख बंदरगाह पर हमला शुरू कर दिया है।
क्षेत्रीय मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि विद्रोहियों पर हवा और समुद्र से बमबारी की जा रही है।

सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि शहर पर हमला किया गया है तो लाखों लोगों की मौत हो सकती है।

यमन में मानवतावादी सहायता के लिए बंदरगाह मुख्य प्रवेश का केन्द्र है।

युद्ध ग्रस्त देश में सात मिलियन से अधिक लोग खाद्य सहायता पर निर्भर करते हैं।

नहीं मानी चेतावनी तो किया ऐसा

सऊदी के स्वामित्व वाले अल-अरबिया नेटवर्क ने बताया कि हुदायदा की मुक्ति ने बड़े पैमाने पर जमीन पर हमला किया था।

इसे नौ-सेना ने समर्थन दिया था। इससे बंदरगाह के शहर से बाहरी हिस्सों पर विस्फोट हुए।
राष्ट्रपति अब्दबबूह मंसौर हादी की यमनी सरकार ने बयान में कहा है कि
विद्रोहियों ने वापस जाने की उनकी तमाम चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।

ऐसे में उन्हें यह कार्रवाई करनी पड़ी। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है,

जो हादी का समर्थन करता है। इसी ने विद्रोहियों को वापस जाने या

फिर हमले का सामना करने का अल्टीमेटम दिया था।

3 साल में 10,000 की मौत

संयुक्त अरब अमीरात के जूनियर विदेश मंत्री अनवर गर्गश ने बताया कि पिछले

48 घंटे की समय-सीमा समाप्त होने के बाद गठबंधन भी राजनयिक प्रयासों के साथ धैर्य से बाहर हो गया था।

उन्होंने कहा कि गठबंधन बंदरगाह पर संयुक्त राष्ट्र का नियंत्रण चाहता है।

लेकिन, विद्रोहियों ने अपने कदम वापस लेने से इनकार कर दिया था।

यमन में गृह युद्ध ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 10,000 लोगों की जान ले ली।
संयुक्त राष्ट्र ने उसे दुनिया की सबसे बुरी मानवीय आपदा बताया है।
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