सबसे बड़े संकट में केजरीवाल सरकार, जानिए 5 अहम बातें

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों पर संकट मंडरा रहा है। आरोप है कि दिल्ली विधानसभा के इन सदस्यों ने विधायक रहते संसदीय सचिव का पद भी धारण किया। चुनाव आयोग इन्हें दोषी मान चुका है और सभी को अयोग्य ठहराने की सिफारिश राष्ट्रपति से कर चुका है। सवाल उठता है कि क्या दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार संकट में है? आगे क्या होगा?

जानिए इसी से जुड़ी अहम बातें –
1. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केजरीवाल को 2015 के चुनावों के बाद पहली बार बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कारण – इन विधायकों की सदस्यता रद्द होती है तो फिर चुनाव होंगे और मौजूदा हालात में केजरीवाल के लिए ये सीटें बचाना बहुत मुश्किल लग रहा है।

2. 2015 के चुनावों में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा के खाते में महज 3 सीटें गई थीं और कांग्रेस तो खाता भी नहीं खोल पाई थी। इसके बाद राजौरी गार्डन सीट से विधायक रहे जरनैल सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। इस तरह मौजूदा स्थिति में आम आदमी पार्टी के पास 66 विधायक हैं।

3. राज्यसभा ने भेजे जाने से कुमार विश्वास खफा हैं। बताया जाता है कि कुमार को कई विधायकों को समर्थन प्राप्त हैं। ऐसे में चुनाव होते हैं तो आम आदमी पार्टी पूरी ताकत से चुनाव नहीं लड़ पाएगी।

3. वैसे भी स्थानीय निकाय चुनाव के बाद से आप कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। तब उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भाजपा को 64 सीट मिली थी, जबकि आप को 21 सीट से संतोष करना पड़ा था। दक्षिण दिल्ली नगर निगम में भाजपा को 70 और आप को 16 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस 12 सीटों पर सिमट गई थी।

4. गुजरात चुनावों में भी आम आदमी पार्टी ने 33 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, जिनमें से एक भी नहीं जीत सका। उल्टा अधिकांश प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।

5. दिल्ली के ऐसे हालात के बीच भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। खबर है कि कांग्रेस ने 2015 के विधानसभा चुनावों में हारे प्रत्याशियों की बैठक भी बुला ली है और आगे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा खेमे से भी ऐसी की खबर है।

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