सरकार की याचिका खारिज, चयनित वेतनमान देने का रेट का आदेश सही

महानगर संवाददाता
जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने कर्मचारी को स्थाई करने के बाद तीन चयनित वेतनमान का लाभ देने के रेट के आदेश को सही बताते हुए राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ की एकल पीठ ने यह आदेश कृषि विभाग और वित्त विभाग की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए दिए।
प्रभावित कर्मचारी गिरिराज शरण माथुर की ओर से अधिवक्ता सीपी शर्मा ने बताया कि प्रार्थी 1967 में सिंचाई विभाग में मेट के पद पर लगा था। वर्कचार्ज कर्मचारी रहने के दौरान उसे मिस्त्री पद दिया गया। वहीं बाद में कर्मचारी को स्थाई कर दिया, लेकिन तय सेवाकाल के बाद उसे केवल 18वें और 27वें साल का चयनित वेतनमान नहीं दिया।
उसे एक चयनित वेतनमान का लाभ यह कहते हुए नहीं दिया गया कि उसे वर्कचार्ज कर्मचारी रहते हुए पदोन्नत किया जा चुका था।
इसे चुनौती देते हुए कर्मचारी की ओर से राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में कहा गया कि जब दोनों चयनित वेतनमान का लाभ देने के लिए सेवा की गणना में स्थाई करने से पूर्व की अवधि को शामिल नहीं किया गया है तो स्थाई करने से पूर्व दी गई पदोन्नति की गणना भी नहीं होनी चाहिए।
जिस पर सुनवाई करते हुए रेट ने कर्मचारी को तीसरा चयनित वेतनमान देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ विभाग की ओर से याचिका दायर की गई। जिसे अदालतने खारिज कर दिया।

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