‘सिख फोरम’ ने सुरक्षा के लिए (एनसीएम) का दरवाजा खटखटाया है.

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के पास स्थित सिखों की छोटी आबादी और एक स्थानीय खासी जनजाति के बीच तनाव की खबरें पिछले कई दिनों से सुर्खियों में हैं. इसी को लेकर ‘सिख फोरम’ ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) का दरवाजा खटखटाया है.

सिख फोरम एक अराजनैतिक संस्था है. इसमें सिख समुदाय से आने वाले प्रोफेशनल्स, उद्यमी, पूर्व सैनिक अधिकारी और नौकरशाह शामिल हैं. सिख फोरम का गठन बांग्लादेश युद्ध के हीरो लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने किया था. सिख फोरम 34 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के बाद अस्तित्व में आया था.

सिख फोरम के सेक्रेटरी जनरल पूर्व डीआईजी प्रताप सिंह की अगुआई में इसके प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से मुलाकात की. इस दौरान शिलॉन्ग की ‘पंजाबी लेन’ में बसे सिख प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई. पंजाबी लेन को ‘स्वीपर्स कॉलोनी’ के नाम से भी जाना जाता है.

29  मई से ही मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में खासी जनजाति और स्वीपर्स कॉलोनी में रहने वाले लोगों के बीच कथित टकराव की खबरें सामने आती रही हैं. इनमें पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों के घायल होने की भी खबरें हैं.

‘स्वीपर्स कॉलोनी’ में रहने वाले सिख उन दलित पंजाबियों के वंशज हैं जिन्हें 1857 से पहले ब्रिटिश शासक अपने साथ  लाए थे. ब्रिटिश इन्हें साफ-सफाई के काम के लिए ही साथ लाए थे.

सिख फोरम के प्रतिनिधिमंडल में शामिल लेफ्टिनेंट कर्नल सुखविंदर सिंह सोढ़ी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य मंजीत सिंह राय से मुलाकात की और शिलॉन्ग के सिख समुदाय को हर संभव सुरक्षा मुहैया कराने का आग्रह किया.

सोढ़ी ने बताया, ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य ने भरोसा दिलाया कि राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों की ओर से पहले ही शिलॉन्ग के सिख समुदाय की सुरक्षा के लिए समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं.’

सोढ़ी ने एनसीएम के सदस्य मंजीत सिंह राय की ओर से दिए आश्वासन पर संतोष जताया. सिख फोरम को उम्मीद है कि एनसीएम के दखल के बाद शिलॉन्ग में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल हो जाएगी.

29 मई के बाद शिलॉन्ग में कर्फ्यू लगाने की भई नौबत आई. वहां स्थिति पर काबू पाने के लिए अर्धसैनिक बलों को भी बुलाना पड़ा.

हालांकि शिलॉन्ग में दलित सिखों और खासी समुदाय के बीच टकराव की स्थिति क्यों आई, इस पर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं. कुछ रिपोर्ट्स में एक पंजाबी महिला के कथित  उत्पीड़न और कुछ में पार्किंग पर विवाद के बाद टकराव होने की बात कही गई. वॉट्सऐप पर अफवाहों ने भी तनाव को बढ़ाने का काम किया.

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