सियासत का बदलता ट्रेंड: कांग्रेस इस बार जीतने वाले पर खेलेगी दांव

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जयपुर। (मुर्तुजा नियाजी) राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पिछली बार की तुलना में इस बार कम मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है। 2013 में कांग्रेस ने 16 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन उनमें से किसी को जीत नहीं मिली थी।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जाति और धर्म को नजरंदाज करके उसी उम्मीदवार को टिकट दिया जाएगा, जिसके जीतने की संभावना सबसे ज्यादा होगी। इसके अलावा राजधानी में भी किशनपोल, आदर्शनगर और हवामहल तीनों विधानसभा में मुस्लिम वोटर्स बहुमत में हैं जहां पार्टी दो विधानसभा क्षेत्रों से मुस्लिम उम्मीदवार उतारती थी। लेकिन अब ये भी घटाकर एक सीट देने की सुगबुगाहट है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पार्टी उसी को टिकट देगी, जिसके जीतने की संभावना ज्यादा होगी। रिजल्ट के दिन सिर्फ सीटें ही गिनी जाती हैं। अभी के ताजा माहौल के अनुसार कांग्रेस ने अब तक किए गए प्रचार अभियान में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को बड़े पैमाने पर नहीं उठाया है। साथ ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सॉफ्ट हिन्दुत्व के लिए मंदिरों में जा रहे हैं और पूजा कर रहे हैं। इससे लगता है कि कांग्रेस भाजपा को उसी के दांव से हराना चाहती है। कांग्रेस के प्रदेश अल्पसंख्यक सेल के प्रमुख निजाम कुरैशी का कहना है कि इस बार मुस्लिमों ने पार्टी से 18-20 सीटें मांगी हैं। हम बेहतर भागीदारी चाहते हैं।

मुसलमानों की घटती नुमाइंदगी
आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत तेजी से गिरता जा रहा है। पहले ही आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व घटने का मतलब होगा कि वह पूरी तरह से हाशिए पर चले जाएंगे। फिर चाहे लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, इसमें जो रुझान दिखाई देता है उसे देखकर समझ आता है कि मुसलमानों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में तेजी से गिरावट हो रही है। देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में उनकी नुमाइंदगी सिमटती जा रही है।

62 साल में एक ही मुस्लिम सांसद
राज्य के इतिहास मुताबिक आजादी के बाद पिछले 62 साल में राजस्थान में सिर्फ एक ही मुस्लिम नेता को संसद में पहुंचने का मौका मिला है। भाजपा ने अपनी स्थापना के बाद से अभी तक एक भी मुस्लिम उम्मीदवार सांसद के लिए मैदान में नहीं उतारा। वहीं कांग्रेस ने अब तक 8 मुस्लिम नेताओं को 12 बार लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है।

हालांकि 1952-57 से लेकर 1980 तक कांग्रेस ने भी सिर्फ जोधपुर में ही मुस्लिम उम्मीदवार पर दांव खेला। यह भी दिलचस्प है कि पिछले 23 साल में प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया। राज्य में सिर्फ झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र के अलावा कहीं से भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया। झुंझुनूं से कैप्टन अयूब खां 1984 और 1991 में सांसद चुने गए। अयूब खां ने चार बार चुनाव लड़ा, जिसमें दो बार उन्हें हार मिली।

राज्य में 9.1 फीसदी मुस्लिम वोटर
राजस्थान की आबादी लगभग 6.86 करोड़ है, जिसमें 9.1 फीसदी मुस्लिम हैं। जैसलमेर में 25.1 फीसदी, अलवर में 14.9 फीसदी, भरतपुर में 14.5 और नागौर में 13.7 फीसदी, कोटा में 11.71 फीसदी, सीकर में 11.44 फीसदी, अजमेर में 11.20 फीसदी, जोधपुर में 10.74 फीसदी, चूरू में 10.93 फीसदी, स. माधोपुर में 10.74 फीसदी, और झुंझुनूं में 10.33 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। इन सीटों पर मुस्लिम वोटों की निर्णायक भूमिका होती है। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी इन जिलों में मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है। जिसमें किशनपोल, शिव, कामां और चूरू में भी कुछ सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं।

अल्पसंख्यकों के जीत की संख्या है कम
पिछले विधानसभा चुनाव 2013 में पार्टी ने 16 उम्मीदवारों को टिकट दिया था। 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने 14 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारा था, जिनमें से 10 को जीत मिली थी। हालांकि, 1985 और 2003 के बीच मुस्लिम उम्मीदवार सिर्फ 1998 में 10 से अधिक सीटें जीत पाए। 1998 में 12 मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत मिली थी। अल्पसंख्यक समुदाय ने 1985 में 2, 1990 में 3, 1993 में 4 और 2003 में 4 सीटों पर जीत हासिल की थी।

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