सीएम सर्बानंद सोनोवाल : लोगों के हितों की रक्षा न कर पाये तो पद पर रहने का कोई मतलब नही

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि अगर वो राज्य के लोगों के हितों की रक्षा नहीं कर सकते तो उनका इस पद पर बने रहने का कोई फायदा नहीं है. सोनोवाल नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 पर जेपीसी की हालिया यात्रा के बाद राज्य में मौजूदा हालात पर रविवार शाम मीडिया के संपादकों के साथ रूबरू हुए थे.सोनोवाल ने कहा ,‘‘ अगर राज्य और उसके लोगों के हित सुरक्षित नहीं कर पाये तो मेरा राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है. इसी कारण हम असम के लोगों के हितों की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे.’

विधेयक में किये गये एक महत्वपूर्ण संशोधन में भारत में छह वर्ष तक रहने के बाद अफगानिस्तान , बांग्लादेश और पाकिस्तान से हिंदू , सिख , जैन , ईसाई , पारसी और बौद्ध धर्म के लोग बिना वैध दस्तावेजों के भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. सोनोवाल ने कहा ,‘‘ मुख्यमंत्री होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है कि सभी को साथ लेकर चलें और केवल खुद से ही निर्णय नहीं ले. असम के लोगों की राय लेकर हम इस मुद्दे पर फैसला करेंगे. ’’

उन्होंने कहा ,‘‘ आप सब लोगों द्वारा दिये गये सुझावों पर मैं गंभीरता से विचार करूंगा और मैं आगामी दिनों में इस संबंध में वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श करूंगा. ’’

उन्होंने लोगों से शांति की अपील की और कहा कि लोगों को आंदोलित होने की जरूरत नहीं है.

मुख्यमंत्री ने कहा ,‘‘ हम असम के लोगों के खिलाफ जाकर कोई फैसला नहीं करेंगे. हम सबको राज्यभर में शांति सुनिश्चित करनी है और सरकार में लोगों का विश्वास कायम रखना है. मैं शांति बनाए रखने के लिए सभी से अपील करता हूं ताकि अप्रिय परिस्थितियां राज्य में पैदा न हो.’’ नागरिकता विधेयक , 2016 को लोकसभा में ‘ नागरिकता अधिनियम ’ 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है.

भाजपा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल की अध्यक्षता वाली 16 सदस्यीय जेपीसी ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर सभी पक्षों से राय जानने के लिए सात मई से नौ मई तक राज्य का दौरा किया था. जेपीसी ने ब्रह्मपुत्र घाटी जिलों के लिए सात मई को और तीन बराक घाटी जिलों के लिए अगले दो दिनों तक गुवाहाटी में व्यक्तियों, राजनीतिक और अन्य संगठनों से विधेयक पर राय ली थी.

बंगाली प्रभुत्व वाली बराक घाटी में ज्यादातर लोग इस विधेयक के पक्ष में हैं जबकि ब्रह्मपुत्र घाटी में लोग इसके विरोध में हैं. जेपीसी की सुनवाई के बाद विधेयक के खिलाफ ब्रह्मपुत्र घाटी में नियमित रूप से विरोध जताया जा रहा है.

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