सीजफायर पर सियासी घमासान, BJP ने CM महबूबा मुफ्ती की मांग को नकारा

मजान पर सीजफायर को लेकर पीडीपी और बीजेपी के बीच घमासान मचा है. सैलानी की हत्या करने वाले और स्कूल बस पर हमला करने वाले पत्थरबाज सेना के ऑपरेशन में बाधा डालने के लिए हमले करते हैं. लेकिन जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री चाहती हैं कि सेना हथियार रख दे क्योंकि रमजान आने वाला है. महबूबा ने बुधवार को केंद्र के सामने यह मांग रखी.

इस बीच जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने दावा किया है कि बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सीजफायर के प्रस्ताव को लेकर कोई सहमति नहीं बनी. बीजेपी के मुताबिक निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद ने सीजफायर की मांग की लेकिन उसे लेकर बैठक में कोई चर्चा ही नहीं हुई. हालांकि बुधवार को जब महबूबा मुफ्ती ने इस प्रस्ताव पर मीडिया को जानकारी दी थी तब उप-मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता उनके बगल खड़े थे. लेकिन बीजेपी ने गुरुवार को साफ कर दिया कि सीजफायर के प्रस्ताव से वो सहमत नहीं है.

बुधवार को कश्मीर में एक सर्वदलीय बैठक के बाद महबूबा ने ये मांग केंद्र के सामने रखी है. ये मांग तब उठी है जब सेना आतंकियों पर कहर बन कर टूट रही है. कश्मीर में आतंकियों के सरगना अपने दिन गिनते हैं. बुरहानी वानी गैंग का सफाया हो चुका है. सेना के इरादे कैसे हैं इसे सेना प्रमुख के बयान से समझा जा सकता है.

‘केंद्र रमजान से अमरनाथ यात्रा संपन्न होने तक संघर्षविराम लागू करे’

सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा था कि केंद्र को मध्य मई में रमजान शुरू होने से लेकर अगस्त में अमरनाथ यात्रा संपन्न होने तक एकतरफा संघर्षविराम बनाए रखने पर विचार करना चाहिए. मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. यह बैठक चार घंटे तक चली. कश्मीर घाटी में खासकर सात मई को पत्थरबाजी के कारण चेन्नई के एक पर्यटक की मौत के बाद मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गयी थी.

उन्होंने कहा कि संघर्षविराम से लोगों को राहत और राज्य में बेहतर माहौल बनाने में मदद मिलेगी. मुख्यमंत्री ने सभी पक्षों से हिंसा और खून-खराबे के चक्रव्यूह से राज्य को निजात दिलाने के मिशन से जुड़ने की अपील की. मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर घाटी में बिगड़े हालात को सुधारने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के फॉर्मूले को अपनाना चाहिए, ताकि ईद और अमरनाथ यात्रा को शांतिपूर्वक आयोजित किया जा सके.

इस सर्वदलीय बैठक के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा, ”हम सभी इस बात पर सहमत हुए हैं कि हम केंद्र सरकार से अपील करेंगे कि वह सीमा पर सीजफायर के लिए अपनी तरफ से पहल करे. वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ऐसा कर चुके हैं. मुठभेड़ और झड़प से घाटी में आम जनता को दिक्कतें हो रही हैं. हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि ईद और अमरनाथ यात्रा दोनों शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें.”

कश्मीरी युवा भूल जाएं ‘आजादी’: जनरल रावत

इस बीच आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कश्मीर के पत्थरबाजों को हिंसा से बाज आने का पैगाम दिया है. आर्मी चीफ ने साफ कहा है कि पत्थरबाज आजादी का ख्याल दिल से निकाल दें क्योंकि ऐसा होना नामुमकिन है. उन्होंने कहा, ‘जो आजादी चाहते हैं वे जान लें ऐसा नहीं होने जा रहा. आप सेना से नहीं लड़ सकते हैं, सेना से लड़कर तो आप कभी भी जीत नहीं सकते. सुरक्षा बल बंदूक उठाने वाले लड़ाकों की तरह क्रूर नहीं हैं. आप सीरिया और पाकिस्तान के हालात देखिए जहां इन हालातों में टैंक और हवाई ताकत का इस्तेमाल होता है.’

पत्थरबाजी में पर्यटक के मारे जाने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण : राजनाथ

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी में 1 पर्यटक के मारे जाने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और चारो तरफ इसकी निन्दा हो रही है. उल्लेखनीय है कि पत्थरबाजों ने सोमवार शाम कश्मीर घूमने आए पर्यटकों पर श्रीनगर-बारामुला हाईवे पर स्थित नारबल के पास हमला कर दिया. इसमें दक्षिण भारत के एक पर्यटक की मौत हो गई थी.

जब जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रमजान और कैलाश मानसरोवर यात्रा के समय एकतरफा युद्धविराम की मांग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमसे इस बारे में प्रत्यक्ष तौर पर कोई बात नहीं हुई है. हमें ऐसी जानकारी मिली है. दिल्ली जाकर इस बारे में बात की जाएगी.

 

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