एनडीए में दरार…बढ़ी मोदी सरकार की मुश्किल

नई दिल्ली। सत्ता की कुर्सी और ताज दोनों में ही कांटे लगे होते हैं। फिलहाल यह बात सटीक बैठती है एनडीए गठबंधन पर। सत्ता के सिंहासन पर जब से मोदी सरकार आई है, तभी से उसके सामने नित नई चुनौतियां आ रही हैं। यह चुनौतियां कोई और नहीं बल्कि भाजपा की सहयोगी पार्टियां दे रही हैं। पहले शिवसेना ने ऐलान किया था कि वह 2019 का आम चुनाव भाजपा के साथ मिलकर नहीं लड़ेगी। अब तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टीडीपी ने आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग की है। इसके बाद से लगातार टीडीपी और सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। मोदी सरकार टीडीपी की इस मांग को मानने को तैयार नहीं है।

मोदी सरकार के सामने यह है मुश्किल

यदि मोदी सरकार टीडीपी की इस मांग को मानती है तो उसे नियमों में बदलाव करने पड़ेंगे। क्योंकि, किसी भी राज्य को विशेष दर्जा देने के लिए नियमों में संशोधन करना पड़ेगा। इसके बाद फिर बिहार और झारखंड भी ऐसी ही मांग करेंगे। ऐसे में सभी को विशेष दर्जा देना मोदी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। इसलिए वह एक सहयोगी पार्टी को खुश करके दूसरी सहयोगी पार्टियों को नाराज करना नहीं चाहती। इसलिए मोदी सरकार आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दे रही है।

आर्थिक सहायता देने को तैयार

हालांकि, मोदी सरकार आंध्रप्रदेश के विकास के लिए आर्थिक सहायता देने को तैयार है। इसके साथ ही विजयवाडा और विशापट्टनम् के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को भी मंजूरी देने को तैयार है। दूसरी तरफ टीडीपी की मांग है कि मोदी सरकार उस वायदे को पूरा करे जो आंध्रप्रदेश के विभाजन के दौरान तत्कालीन सरकार ने किया था।

इसलिए टीडीपी के हौसले बुलंद

संसद में भी टीडीपी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, तो वहीं शिवसेना ने भी टीडीपी की मांग को जायज मानते हुए संसद में टीडीपी का समर्थन किया। इसके साथ ही कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद टीडीपी के हौंसले बुलंद हैं। टीडीपी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में चंद्रबाबू नायडू मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए केंद्र सरकार से अपने मंत्रियों का इस्तीफा करा सकते हैं।

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