2019 में ऐसी अनौपचारिक बातचीत के लिए भारत आएं, मुझे खुशी होगी: वुहान में मोदी का जिनपिंग को न्योता

0
68

बीजिंग. चीन के शहर वुहान में शुक्रवार को मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो मुलाकातें हुईं। हुबेई म्यूजियम में पहली बातचीत करीब आधा घंटा मुलाकात चली। इस दौरान मोदी ने यहां बने तीन बांधों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आपने जिस पैमाने पर और जिस तेजी के साथ इन्हें बनाया है। मैं इससे काफी प्रभावित हूं। प्रतिनिधिमंडल के साथ दूसरी मुलाकात में मोदी ने जिनपिंग को 2019 में अनौपचारिक बातचीत के लिए भारत आने का न्योता दिया। बता दें कि मोदी का चार साल में यह चौथा चीन दौरा है। दोनों नेताओं के बीच 6 मुलाकातें होनी है। शनिवार सुबह दोनों नेता झील किनारे पैदल घूमेंगे, फिर नाव पर चर्चा करेंगे। इन मुलाकातों को ‘अनौपचारिक शिखर वार्ता’ नाम दिया गया है। मोदी ने कहा कि भारत के लोग वास्तव में बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि मैं पहला ऐसा भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो बार राजधानी से बाहर आए।
“मुझे खुशी है कि इस समिट को आपने काफी महत्व दिया। ये इन्फॉर्मल समिट हमारी रेग्युलर व्यवस्था को विकसित करे। मुझे खुशी होगी कि 2019 में ऐसी ही एक अनौपचारिक समिट करने का हमें मौका मिले।”
“विश्व की 40 फीसदी जनसंख्या के लिए काम करना चीन और भारत की जिम्मेदारी है। इसका मतलब है कि हम विश्व की बहुत सारी समस्याओं से छुटकारा पा लेंगे। हम साथ मिलकर हमारे लिए बड़ी संभावनाओं के लिए काम करेंगे।”
“इस अनौपचारिक समिट के जरिए बेहद सकारात्मक माहौल बनाया गया और आपने (जिनपिंग) ने व्यक्तिगत तौर पर इस में बड़ा और अहम योगदान दिया। भारत और चीन पिछले 2000 साल में से 1600 साल से वैश्विक आर्थिक विकास के दो इंजिन की तरह काम कर रहे हैं।”

 

शी जिनपिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री से अनौपचारिक बातचीत के लिए पहली बार प्रोटोकॉल तोड़ा। मोदी ने कहा- “जब मैं गुजरात का सीएम था, तब इन बांधों के बारे में सुना था। आपने जिस पैमाने पर और जिस तेजी के साथ इन्हें बनाया है, इसने मुझे प्रभावित किया। यही वजह है कि मैं स्टडी टूर पर आया हूं और एक दिन डैम पर बिताने का फैसला लिया।

“भारत और चीन दोनों की संस्कृतियों का संबंध नदियों से हैं। यदि हम हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की प्राचीन सभ्यता की बात करें तो ये नदियों के किनारे पर ही बसी थीं।”

मोदी के दौरे में चार बातें पहली बार
1
) मोदी सबसे ज्यादा चौथी बार चीन का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने। उनसे पहले उनसे पहले मनमोहन सिंह तीन बार चीन गए थे। 4 साल में जिनपिंग सिर्फ एक बार भारत आए हैं।
2) मोदी ऐसे पहले पीएम हैं जिनके लिए जिनपिंग ने प्रोटोकॉल तोड़कर अनौपचारिक बातचीत तय की है। अभी तक मोदी की आधिकारिक मुलाकात प्रधानमंत्री ली केकियांग से होती रही थी। केकियांग के बाद वे जिनपिंग से मिलने जाते थे।
3) पहली बार ऐसा हो रहा है, जब भारत-चीन के किसी नेता की बैठक के बाद ना तो संयुक्त बयान जारी होगा, ना ही मीडिया ब्रीफिंग होगी।
4) मोदी-जिनपिंग के बीच यह 11वीं बार बातचीत होगी। इससे पहले मोदी सबसे ज्यादा 8 बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिले थे।

इस बीच राहुल गांधी ने कहा कि मोदी को अपने इस बिना किसी एजेंडे के दौरे में चीन के साथ डोकलाम, पाक कॉरिडोर (सीपीईसी) का मुद्दा भी उठाना चाहिए।

राहुल ने कहा, “मैंने टीवी पर मोदी की नो एजेंडा दौरे की तस्वीरें देखीं। वे तनाव में नजर आ रहे थे। देश जानना चाहता है कि आपने इन गंभीर मुद्दों पर क्या बात की। हम आपके साथ हैं।”

1) शुक्रवार को दोनों नेताओं की पहली मुलाकात हुबेई म्यूजियम में हो चुकी है। दोनों नेताओं ने यहां म्यूजियम भी देखा।

2) मोदी-जिनपिंग की दूसरी चर्चा ईस्ट लेक के पास स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में होगी। इसमें दोनों तरफ से 6-6 अफसरों का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा।
3) दोनों नेताओं के बीच डिनर के बाद भी चर्चा होगी।
4) शनिवार सुबह दोनों नेता ईस्ट लेक के किनारे टहलते हुए चर्चा करेंगे।
5) इसके बाद मोदी और जिनपिंग नाव की सवारी करेंगे।
6) शनिवार को लंच के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात होगी।

एनालिसिस : मोदी के लिए प्रोटोकॉल तोड़ेंगे जिनपिंग
चीन में भारत के रक्षा सलाहकार रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन कहते हैं कि मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनके लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अनौपचारिक शिखर बैठक तय की है। प्रोटोकॉल पर बेहद ध्यान देने वाली चीनी राजनीति में यह बहुत बड़ा अपवाद है।

“चीन का राष्ट्रपति किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री के साथ शिखर बैठक करे, यह वाकई बड़ी कूटनीतिक घटना है। यह मोदी-जिनपिंग के बीच के निजी रेपो से संभव हो पाया है।”
“अभी तक मोदी जब भी चीन की यात्रा पर आए, उनकी आधिकारिक मुलाकात प्रधानमंत्री ली केकियांग से होती रही थी। इसके बाद वह राष्ट्रपति जिनपिंग से मिलते थे। इसीलिए वुहान में अनौपचारिक शिखर बैठक तय की गई है। दरअसल, बीजिंग में बैठक होने से प्रोटोकॉल आड़े आ जाता।”
सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के निदेशक लेफ्टीनेंट जनरल विनोद भाटिया ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बाद चीन ने मोदी के लिए यह प्रोटोकॉल तोड़ा है। जब प्रधानमंत्री के बजाए खुद राष्ट्रपति उनके साथ शिखर बैठक करेंगे। अमेरिका में प्रधानमंत्री का पद है ही नहीं। यह दुनिया के सबसे पावरफुल नेताओं में से दो की मुलाकात है।

मोदी के दौरे की तुलना 1988 में हुए राजीव गांधी के चीन दौरे से की जा रही है। तब 1962 के भारत-चीन युद्ध के 26 साल बाद राजीव ने दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को दूर करने की कोशिश की थी। डेंग शियाओपिंग से उनकी मुलाकात काफी हद तक कामयाब भी रही थी।

मोदी इस साल जून में एक बार फिर शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक में शामिल होने चीन जाएंगे।
पीएम बनने के बाद मोदी 47 महीने में 55वीं बार विदेश दौरे पर हैं।
मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 67 साल में सिर्फ पांच प्रधानमंत्रियों ने चीन का दौरा किया था। इनमें जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी, नरसिम्हा रावऔर मनमोहन सिंह शामिल हैं।

क्यों बार-बार चीन जा रहे मोदी? कद बढ़ाने, विवाद सुलझाने और रुतबे की चाह
शंघाई सहयोग संगठन

जून में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) की बैठक होनी है। भारत काफी समय से इस संगठन में अपना कद बढ़ाना चाहता है, इसलिए मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात के गहरे मतलब निकाले जा रहे हैं। इसमें पीएम मोदी, शी जिनपिंग से भारत की संगठन में भागीदारी बढ़ाने की वकालत कर सकते हैं।

मोदी-जिनपिंग की इस अनौपचारिक शिखर वार्ता को डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट दूर करने की कोशिश भी समझी जा रही है। इसमें 2 साल से संबंधों में आई तल्खी को दूर करने और रिश्तों को और मजबूत करने की पहल संभव है। आर्थिक गतिविधि बढ़ाने पर भी बात हो सकती है।

बैठक के लिए एजेंडा घोषित नहीं है। पर इसमें डोकलाम के अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, एनएसजी सदस्यता, व्यापार और भारत में चीनी निवेश पर बातचीत हो सकती है। चीन 2013 में बॉर्डर डिफेंस को-ऑपरेशन एग्रीमेंट पर अलग फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रख सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...