55 साल के इंतजार के बाद मिला कृषि भूमि पर अधिकार

महानगर संवाददाता डूंगरपुर। डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत कहारी में आयोजित राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर में जब परिवादियों को पचपन साल बाद पैतृक कृषि भूमि में हिस्सा मिला तो आंखें खुशी से छलक उठीं।
राजस्व शिविर में पहुंचे धुला पिता तेजा एवं हूका पिता तेजा के वारिसान मान, सेंगा, हूरज पुत्री हूका को हाथों-हाथ समाधान मिलने से 55 साल बाद पैतृक कृषि भूमि में हिस्सा मिल ही गया।

कहारी ‘ए’ के गत सैटलमेंट के खाता नंबर 13 तेजा वल्द हीरा के नाम दर्ज था, उसकी मृत्यु होने के पश्चात जमाबंदी में बड़े पुत्र खेमा के नाम दर्ज हो गया। उसकी मृत्यु के पश्चात उक्त भूमि उसके वारिसान धीरजी, सोमी, शान्ति, काउडी, कमली पत्नी खेमजी के नाम चली गई। खेमजी के भाई धुला एवं हूका पैतृक सम्पति के अधिकार से वंचित रह गए। ऐसे में धुला एवं हुका के वारिसान माना, सेंगा, हुरज ने अपना नाम जुड़वाने के लिए एक वाद कार्यालय उपखण्ड अधिकारी डूंगरपुर को प्रस्तुत किया। यह वाद विगत छ: वर्षों से विचाराधीन रहा।

इस दौरान जिले में राजस्व लोक अदालत न्याय-आपके द्वार अभियान, 2018 प्रारंभ हुआ। इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत कहारी में आयोजित शिविर में मौके पर खेमा, हुका एवं धुला के वारिसान वादीगण एवं परिवादीगण भी पहुंचे।

य की उम्मीद से पहुंचे इन सभी के उपस्थित होने पर शिविर अधिकारियों द्वारा वादियों एवं परिवादियों में काफी देर तक समझाइश की गई। दोनों पक्षों के आपसी रजामंदी से सहमति व्यक्त करने पर तत्काल उपखण्ड अधिकारी ने नाम जोडऩे का आदेश दिया।

पचपन साल बाद मिले न्याय से जहां पुरा कुनबा अभिभूत हुआ वहीं बरसों से चला आ रहा मनमुटाव भी दूर हुआ । इस मौके पर लाथार्थियों के साथ ही उपस्थित ग्रामवासियों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए राजस्व शिविरों को विवादों के निपटाने के लिए वरदान बताते हुए राज्य सरकार का आभार जताया।
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