गंगा सहित नदियों के लिए बनेंगी ‘रिवर बेसिन अथॉरिटी’

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नई दिल्ली। जल के बेहतर प्रबंधन और अंतर्राज्यीय जल विवादों को निपटाने के मकसद से सरकार गंगा नदी के साथ-साथ दर्जनभर अन्य नदियों के लिए ‘रिवर बेसिन अथॉरिटी’ बनाने की तैयारी कर रही है।

केंद्र इस दिशा में कदम उठाते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में ‘रिवर बेसिन मैनेजमेंट बिल 2018’ पेश कर सकता है। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने इस विधेयक का मसौदा तैयार कर आम लोगों की प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक कर दिया है।

इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद जिन नदियों के लिए रिवर बेसिन अथॉरिटी का गठन किया जाना है उनमें गंगा बेसिन, गोदावरी बेसिन, ब्रह्मपुत्र-बराक और पूर्वोत्तर की अन्य नदियों के बेसिन, ब्रह्माणी – वैतरणी बेसिन, कावेरी बेसिन, सिंधु बेसिन, कृष्णा बेसिन, महानदी बेसिन, माही बेसिन, नर्मदा बेसिन, पेन्नार बेसन, स्वर्णरेखा बेसिन और तापी बेसिन शामिल हैं।

बेसिन का मतलब एक ऐसे भौगोलिक क्षेत्र से है जिसमें एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियां प्रवाहित होती है और यह नदी जाकर समुद्र से मिलती है।

देश में अलग – अलग नदियों के जल को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच विवाद रहे हैं। यही वजह है कि लंबे अरसे से इस तरह के कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी।

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में 2008 में रिवर बेसिन ऑर्गेनाइजेशन बनाने की सिफारिश की थी। प्रस्तावित कानून रिवर बोर्ड एक्ट 1956 का स्थान लेगा जो काफी पुराना हो चुका है।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कानून बनने से अंतर राज्य नदियों के जल प्रबंधन के मामले में आपसी विवाद की जगह पारस्परिक सहयोग का माहौल बनेगा। इसके तहत जल के एकीकृत प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।

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