8 पीएम के बाद सडक़ पर ही सज जाती हैं शराब की बोतलें, गलियों में बिकता है गांजा

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जयपुर। (विजय सैन) प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीख तय हो चुकी है और आचार संहिता लग चुकी है। लेकिन बावजूद इसके राजधानी के जवाहरनगर थाना इलाके में शराब माफिया इस कदर हावी है कि रात आठ बजे के बाद शराब की ब्रिकी पर सरकार द्वारा लगाई पाबंदी महज दिखावा बन गई है।

आदर्श आचार संहिता के नियमों की जमकर उड़ रही धज्जियां

इलाके के टीला नंबर छह स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान के सामने रात आठ बजे के बाद सडक़ किनारे फुटपाथ पर शराब माफियाओं द्वारा खुलेआम देर रात तक मनमाने दामों पर अंग्रेजी एवं देशी शराब की ब्रिकी कर आचार संहिता के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

वहीं थोड़ा आगे चलकर टीला नंबर एक और तीन की गलियों में सुबह से लेकर देर रात तक मादक पदार्थ गांजा ऐसे बिकता है जैसे किसी परचून की दुकान पर घरेलू सामान की खरीददारी के लिए ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है। ऐसा नहीं है कि यहां से थाना पुलिस का चेतक वाहन नहीं गुजरता हो लेकिन कार्रवाई कभी-कभार ही देखने को मिलती है।

पचास और सौ रुपए में महिला बेचती हैं गांजा
महानगर संवाददाता ने जब जवाहरनगर थाना इलाके स्थित टीला नंबर एक और तीन की गलियों में बिक रहे गांजे की पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मादक पदार्थ को खरीददार गांजा की जगह माल की पुडिय़ा कह रहे थे।

जिन मकानों में यह मादक पदार्थ बिक रहा था उस जगह पर कम उम्र के बच्चों से लेकर युवा वर्ग की भीड़ लगी हुई थी। जब महानगर संवाददाता गांजा विक्रेता महिला के पास पहुंचा और माल की पुडिय़ा मांगी तो महिला ने जवाब दिया छोटी चाहिए या बड़ी। छोटी पुडिय़ा पचास रुपए की और बड़ी पुडिय़ा सौ रुपए की है। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में कई वर्षों से गांजा का अवैध कारोबार खुलेआम हो रहा है।

युवा वर्ग सबसे ज्यादा चपेट में
नशे के इस व्यापार से सबसे ज्यादा युवा वर्ग चपेट में हैं। कॉलेज एवं स्कूल में पढऩे वाले लडक़े-लड़कियां भी इसका इस्तेमाल कर अपनी जिंदगी को नरक बना रहे हैं। जो कि चिंता का विषय है। वहीं अपराधी तत्व भी इस नशे को करने के बाद वारदातों को अंजाम देते हैं। इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए नारकोटिक्स एक्ट बनाया गया है, लेकिन पुलिस व आबकारी विभाग गांजा की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जिससे शहर में अमरबेल की तरह फल-फूल रहे इस कारोबार से कई जिन्दगियां नशे की जद में आ चुकी हैं। युवाओं में बढ़ती लत के चलते यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन इस पर अंकुश लगा पाने में पुलिस महकमा नाकाम साबित हो रहा है। ऐसा नहीं है पुलिस कार्रवाई नहीं करती, लेकिन इसके बाद भी बेखौफ नशे के नाम पर मौत का सामान खुले में बेचा जा रहा है।

देर रात तक बिकती है शराब
सरकार की आबकारी नीति के अनुसार शराब की दुकानें रात आठ बजे बंद हो जाने के बाद शुरू होता है शराब माफियाओं की काली कमाई का खेल, जिसमें ये लोग देर रात तक अपनी दुकान जमा कर लोगों को मनमाने दामों में शराब की बिक्री करते हैं। थाना इलाके के टीला नंबर छह स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान के सामने आस-पास की गलियों में शराब माफियाओं द्वारा फुटपाथ पर ही रखकर अंग्रेजी एवं देशी शराब जमकर बेची जाती है। ये लोग शराब की प्रिंट रेट से अधिक दाम लेकर रातभर काली कमाई करते हैं। थाने का चेतक वाहन यहां से गश्त के दौरान गुजरता भी है लेकिन कारण क्या है समझ से परे है कि ये काला धंधा उसमें सवार पुलिसकर्मियों को दिखाई क्यों नहीं देता।

नशे के बाद होती हैं वारदातें
राजधानी में हुई आपराधिक वारदातों के खुलासों में अधिकतर देखा गया है कि अपराधी ने शराब या अन्य कोई नशा करने के बाद वारदात को अंजाम दिया। शहर में इन दिनों लूट, चेनस्नेचिंग, मोबाइल स्नेचिंग, चोरी की वारदातों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिसका एक कारण यह भी हो सकता है क्योंकि जब देर रात तक भी अपराधी को आसानी से उसके नशे का सामान मिलेगा तो जाहिर सी बात है कि नशे में होने के बाद उसके दिमाग में वारदातें करने का खयाल आएगा और वह उसे अंजाम देगा।

इनका कहना है
अभी तक हमारे पास इसकी कोई शिकायत नहीं आई थी। अब टीम गठित कर इसकी पड़ताल करवाएंगे। यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-गौरव यादव, पुलिस उपायुक्त, जयपुर, पूर्व

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