नए राजस्थान के आर्किटेक्ट बनें शिक्षक: राजे

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जयपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि हमने एक उन्नत, समृद्ध और प्रगतिशील राजस्थान का सपना देखा है जो प्रदेश के सभी शिक्षकों के सहयोग और योगदान से पूरा होगा। शिक्षक नए राजस्थान के आर्किटेक्ट बनें और अपने काबिल कंधों पर जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश का भविष्य संवारने का काम करें। राजे बुधवार को अमरूदों का बाग में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेशभर से आए हजारों शिक्षको को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित प्रदेश ही विकसित प्रदेश बन सकता है और यह शिक्षकों की मेहनत से ही संभव है।

उन्होंने समारोह में सभी शिक्षकों का वंदन करते हुए कहा कि आपकी ही मेहनत और लगन से प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में आज देशभर में 26वें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी है और इसी का परिणाम है कि निजी स्कूलें छोड़कर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के उत्थान के लिए 78 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है। वर्तमान में 87 हजार से अधिक पदों पर और भर्तियां की जा रही हैं जिसके बाद मात्र दो से तीन प्रतिशत पद ही खाली रह जाएंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 36 शिक्षकों को वर्ष 2018 के राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार, 33 अध्यापक एवं संस्था प्रधानों को श्रीगुरुजी सम्मान और प्रशंसनीय कार्य के लिए 16 शिक्षकों को शिक्षक सम्मान प्रदान किए। उन्होंने जिला शिक्षा रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर चूरू जिला कलेक्टर मुक्तानंद अग्रवाल, हनुमानगढ़ कलेक्टर दिनेशचंद जैन और झुंझुनूं कलेक्टर दिनेश कुमार यादव सहित 15 अधिकारियों को भी सम्मानित किया।

शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की जो गुणवत्ता बढ़ी है, उसके बाद अन्य राज्य भी प्रदेश के मॉडल को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार प्रदेश में 1 लाख 27 हजार शिक्षकों को पदोन्नति दी गई है जो शिक्षा जगत के लिए गर्व की बात है। इस अवसर पर पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री राजेन्द्र राठौड़, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, सांसद रामचरण बोहरा, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष प्रो. बीएल चौधरी और प्रमुख शासन सचिव स्कूल शिक्षा नरेश पाल गंगवार उपस्थित थे।

720 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा कोर्स, 185 में और खुलेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा को रोजगार से जोडऩे के लिए 720 सैकंडरी और सीनियर सैकंडरी स्कूलों में 10 ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स शुरू किए गए हैं। वर्ष 2018-19 में 185 और नए स्कूलों में भी व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीएड और बीएसटीसी के 2 लाख विद्यार्थियों को भी सरकारी स्कूलों में इंटर्नशिप के लिए लगाया गया है ताकि अच्छे शिक्षक तैयार हो सकें।

66 लाभार्थी छात्राओं को स्कूटी, साइकिल, लैपटॉप और चैक वितरित

मुख्यमंत्री ने ईबीसी की 11 मेधावी छात्राओं को स्कूटी, 11 मेधावी छात्राओं को पद्माक्षी पुरस्कार में एक-एक लाख रुपए के चैक, स्कूटी, लैपटॉप योजना मेें 11 मेधावी छात्राओं को लैपटॉप, साइकिल वितरण योजना में 11 लाभार्थी छात्राओं को साइकिल, टीएडी स्कूटी वितरण योजना में 11 लाभार्थी छात्राओं को स्कूटी और देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण योजना में 11 मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान प्रशस्ति पुस्तिका, प्रायोगिक शिक्षा पर पुस्तक तथा शिविरा विशेषांक का भी विमोचन किया।

बोर्ड परीक्षाओं में परिणाम 58 से बढ़कर पहुंचा 80 प्रतिशत

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि हमारी सरकार आने से पहले बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम जहां 58 प्रतिशत जाता था, यह परिणाम पिछले चार साल में बढ़कर 80 प्रतिशत पहुंच गया है। ये सब शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है। आज सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं। यही कारण है कि प्राइवेट स्कूलों से बच्चे सरकारी की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसी की बदौलत राज्य के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है वहीं अन्य राज्यों में इसमें कमी आ रही है।

आधे घंटे के भाषण में शिक्षकों के चार बार जोड़े हाथ

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत शिक्षकों के हाथ जोड़कर की। मुख्यमंत्री का भाषण करीब आधे घंटे तक चला। इस पूरे भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए कार्यों और प्रदेश को उच्च स्तर पर पहुंचाने के लिए और आगे भी इसी ऊर्जा के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए उन्हें चार बार हाथ जोड़कर प्रणाम किया। मुख्यमंत्री के उद्बोधन से शिक्षक काफी खुश दिखे।

इधर, शिक्षकों का सम्मान होता रहा उधर खाली हो गई कुर्सियां

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के संबोधन के बाद शिक्षकों का सम्मान किया गया। जैसे ही मुख्यमंत्री का भाषण समाप्त हुआ, प्रदेश भर से आए शिक्षक कुर्सियों से उठकर चल दिए। ऐसे में सम्मान समारोह के कार्यक्रम के दौरान चारो तरफ खुर्सियां खाली ही खाली नजर आ रही थी। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को मुख्यमंत्री के द्वारा सम्मान करने का सिलसिला करीब पौंन घंटे तक चल। सम्मान समारोह के अंतिम समय कुछ ही ब्लॉकों में शिक्षक नजर आए, ज्यादतर कुर्सियां खाली हो चुकी थी

शिक्षकों को रात से ही झेलनी पड़ी परेशानी

शिक्षक सम्मान समारोह में भाग लेने के लिए प्रदेश भर से शिक्षकों का मंगलवार दोपहर बाद से ही जयपुर पहुंचने का सिलसिल शुरू हो गया था। शिक्षकों की जयपुर के आसपास के इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों के रुकने की व्यवस्था की गई थी। कई स्कूलों में उनकी क्षमता से अधिक शिक्षकों के रुकने की व्यवस्था कर दी। ऐसे में उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन स्कूलों की 500 से 700 बच्चों के बैठने की क्षमता है उनमें एक हजार से 1500 शिक्षकों को रोका गया। इससे उन्हें बड़ी परेशानी से होकर गुजरना पड़ा।

रजिस्ट्रेशन के लिए खड़ा रहना पड़ा लाइन में

सम्मान समारोह में शामिल होने से पहले जिन स्कूलों में शिक्षक रुके हुए थे, वहीं पर उनका रजिस्ट्रेशन किया गया। रजिस्ट्रेशन के लए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से शिक्षकों को लाइनों में खड़ा रहना पड़ा। सुबह के समय यहां तक कि शौचलायों और स्नानघरों में जाने के लिए भी शिक्षकों की लाइनें लग गई। प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों से आए शिक्षकों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी।

सुबह से जाम से जूझते रहे शहरवासी

अमरूदों के बाग में बड़े स्तर पर हुए राज्य शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश भर से शिक्षकों के आने के चलते शहर में सुबह से ही जगह-जगह जाम लगता रहा। जाम लगने का यह सिलसिला सुबह से शुरू हुआ जो शाम पांच बजे तक लोग सड़कों पर जाम से जूझते रहे। जाम के दौरान वाहन रेंग-रेंग कर चलते रहे। सुबह के समय घर से ऑफिस के लिए निकले लोग जाम में फंसने से कार्यालय पहुंचने में लेट हो गए। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं सम्मान समारोह में आए शिक्षक भी जाम में फंसने से परेशान होते रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘सृजन’ की मुख्यमंत्री ने की तारीफ

शिक्षक दिवस के राज्य स्तरीय सम्मान समारोह की पूर्व संध्या पर सोमवार को बिड़ला सभागार में आयोजित सांस्कृतिक संध्या ‘सृजनÓ कार्यक्रम की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जमकर तारीफ की। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान कहा कि मुझे इसका मलाल है कि मैं सांस्कृतिक संध्या ‘सृजन’ कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकी। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

कुर्सियां पड़ गई कम

सम्मान समारोह में आए शिक्षकों के बैठने के लिए जो कुर्सियां लगाई गई थी वो कम पड़ गई। कुर्सियां कम पडऩे पर शिक्षकों को नीचे ही बैठना पड़ा, वहीं कई शिक्षक कार्यक्रम स्थल से वापस लौट गए। झालावाड़ से आए शिक्षक महिपाल यादव ने बताया कि कुर्सी नहीं मिलने पर वह वापस लौट आया। उसने बताया कि वह जयपुर से ही है और वह अपने घर जा रहा है।

उपस्थिति दर्ज करवाने का शिक्षकों में दिखा डर

प्रदेशभर से अमरूदों के बाग में आए शिक्षकों में उपस्थिति दर्ज करवाने का डर साफ दिखाई दे रहा था। कार्यक्रम में आए शिक्षक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए भटकते रहे। जब यह बात मंच संचालकों तक पहुंची तो मंच से स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी कि यहां पर अलग से शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने की कोई व्यवस्था नहीं है। शिक्षक अपने ब्लॉक और संबंधित अधिकारियों के पास ही उपस्थिति दर्ज करवाएं।

बिना स्कूटी घर लौटी बेटियां

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में भले ही स्कूटी पाकर बेटियां खुश हो गई, लेकिन वास्तविकता यह है कि वे फिलहाल स्कूटी की मालकिन नहीं बन पाएंगी। दरअसल, बुधवार को समारोह में मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की गई थी और इन स्कूटियों की चाबी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इन छात्राओं को दी थी। लेकिन ये स्कूटियां छात्राओं के घर जाने की बजाय फिर से शोरूम में पहुंच गई, क्योंकि जिन छात्राओं को यह स्कूटी दी गई उनके पास या तो ड्राइविंग लाइसेंस नहीं थे या फिर कम उम्र होने के कारण वे लाइसेंस बनवाने के योग्य नहीं हैं। ऐसे में अब इन छात्राओं के अभिभावकों के नाम से यह स्कूटी जल्दी ही इन्हें सुपुर्द की जाएंगी। लेकिन स्कूटी घर पर नहीं ले जाने की मायूसी छात्राओं के चेहरे पर साफ दिखाई दी। मामले का पता तब लगा जब कार्यक्रम समाप्ति के बाद बेटियां खाली हाथ लौटने लगी। मौके पर मौजूद शोरूम के कर्मचारियों ने बताया कि यह स्कूटी अब दोबारा शोरूम ले जाई जाएंगी। कुछ दिन बाद शिक्षा विभाग से मिली सूची के अनुसार इनके अभिभावकों को यह स्कूटी दी जाएंगी।

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