अंतरिक्ष में दुनिया का पहला सौर ऊर्जा स्टेशन बनाएगा चीन

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चीन अंतरिक्ष में दुनिया का पहला सौर ऊर्जा स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहा है, जो स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेगा। चीन के विज्ञान और तकनीक मंत्रालय के आधिकारिक समाचार पत्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी की खबर में इसका दावा किया गया है।

इससे पहले चीन की तरफ से कृत्रिम सूरज और चंद्रमा के निर्माण की बात कही जा चुकी है। कृत्रिम सूरज बनाने की तैयारी में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। अब अंतरिक्ष में दुनिया का पहला सौर ऊर्जा स्टेशन बनाने की बात कहकर चीन ने एक बार फिर सबका ध्यान खींचा होगा।

2050 तक होगा स्थापित:

खबर में दावा किया गया है कि सौर ऊर्जा स्टेशन बनाने के लिए तकनीक की टेस्टिंग शुरू की जा चुकी है। 2050 तक इस स्टेशन को बनाए जाने की उम्मीद है।  चोंगक्युइंग कोलेबोरेटिव इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के डिप्टी हेड झी गेंगक्सिन के मुताबिक चोंगक्युइंग के बिशन जिले में एक टेस्टिंग चल रही है, जिसका उपयोग अंतरिक्ष-आधारित सौर ऊर्जा स्टेशन की सैद्धांतिक व्यावहारिकता का परीक्षण करने के लिए किया जाएगा।

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सूक्ष्मतरंगों के वापस पृथ्वी पर आकर जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करने के लिए 33 एकड़ का टेस्ट फैसिलिटी सेंटर अंतरिक्ष प्रसारण तकनीक का विकास करेगा।

निर्माण में लगेंगे दो साल:

बिशन डिस्ट्रिक सरकार की ओर से इस टेस्टिंग में शुरुआती तौर पर 100 मिलियन युआन (165 करोड़ रुपए) का निवेश किया जाएगा। इस निर्माण कार्य में दो साल तक का समय लग सकता है। लेकिन, एक बार अगर इसका संचालन शुरू हो जाता है, तो वैज्ञानिक और इंजीनियर माइक्रोवेव ट्रांसमिशन प्रौद्योगिकियों को सत्यापित करने के लिए सौर पैनलों से लैस टेथर्ड बलून (tethered balloons)का उपयोग करेंगे। वैज्ञानिक गेंगक्सिन ने कहा, हमने परीक्षण बेस से चार से छह टेथर्ड बलून लॉन्च करने और लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर एक नेटवर्क स्थापित करने के लिए उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने की योजना बनाई है।

सूक्ष्मतरंगों में परिवर्तित होगी सौर ऊर्जा :

टेथर्ड बलून सूर्य की रोशनी को एकत्र करेंगे और सौर ऊर्जा को वापस पृथ्वी पर पहुंचने से पहले सूक्ष्मतरंगों में परिवर्तित करेंगे। पृथ्वी पर रिसीविंग स्टेशन इन सूक्ष्मतरंगों को विद्युत में परिवर्तित करके ग्रिड में वितरित करेंगे।
छह गुना ज्यादा गर्म होगा चीन का सूरज: चीन कृत्रिम सूरज बनाने की तैयारी में है, जो असली सूरज के मुकाबले 6 गुना ज्यादा गर्म होगा। कृत्रिम सूरज की टेस्टिंग जारी है।

आधुनिक विचार में चीन की दिलचस्पी
पहली बार 1968 में एयरोस्पेस इंजीनियर पीटर ग्लेसर द्वारा जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में एक पावर-जनरेटिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने का आइडिया पेश किया गया था। तब से यह वैज्ञानिकों की पसंद बना हुआ है, लेकिन तकनीकी और वित्तीय बाधाओं के कारण यह संभव नहीं हो सका। वर्तमान में यह दूर की कौड़ी लग सकती हैं, लेकिन चीन और जापान दोनों ही देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां इन विचारों को गंभीरता से अपना रही हैं, जो कभी विज्ञान कथाओं के सामान थे।

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