दिव्यांग बुजुर्ग ने बंजर पहाड़ को जंगल बनाया, जानिए कैसे

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क्या कोई इंसान बंजर पर्वत पर हरियाली ला सकता है वो भी बिना पैरों के। यह बात सोच से परे है, लेकिन चीन में एक व्यक्ति ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। 70 साल के इस बुजुर्ग ने पिछले 19 सालों में एक बेहद ही दुर्गम पर्वत पर 17,000 पेड़ लगाकर उसे एक हरे-भरे जंगल में तब्दील कर दिया है। यही नहीं वह इन पेड़ों की पूरी शिद्दत से देखभाल भी करते हैं।

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बीमारी से खराब हुए पैर : उत्तरी चीन के हेबेई प्रांत के मायू गांव में रहने वाले मा सैंक्सियाओ के एक बीमारी के कारण दोनों पैर खराब हो गए थे। उन्होंने शुरुआत में रुपये कमाने के लिए पेड़ लगाना शुरू किया, लेकिन अब वह समाज व पर्यावरण की भलाई के लिए पेड़ लगाते हैं।

सूर्योदय से पहले ही जुट जाते हैं कार्य में:  मा को देख स्थानीय लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं क्योंकि वह एक असाधारण कार्य कर रहे हैं। जहां इस पहाड़ पर किसी साधारण इंसान के लिए चढ़ना भी आसान नहीं होता वहां मा अपने औजारों की सहायता से इस पर आसानी से चढ़ जाते हैं और पेड़ लगाते हैं। विशेष रूप से कुदाल की सहायता से वह पहाड़ पर चढ़ते हैं। Image result for पेड़ लगाकर बंजर पहाड़ को जंगल बनाया

चाइना न्यूज के अनुसार, सेवानिवृत्त सैनिक मा अक्सर अपने घर से सूर्योदय से पहले सुबह 5 बजे अपने गांव में स्थित ताहंग पर्वत शृंखला पर पेड़ लगाने के लिए निकल जाते हैं। वह अपने साथ भोजन ले जाते हैं और आमतौर पर पूरा दिन पेड़ लगाने के लिए पहाड़ पर ही बिताते हैं।

निकाल देते हैं कृत्रिम पैर:  मा को जिस जगह पर पेड़ लगाने होते हैं वह वहां पर पहुंचते हैं और अपने कृत्रिम पैरों को निकाल देते हैं । पहाड़ पर पेड़ लगाने और आगे जाने के लिए वह कुदाल का प्रयोग करते हैं । वह कुदाल की सहायता से रेंग-रेंग कर चलते हैं। वह मोटे दस्ताने हाथ में पहनते हैं और बाकायदा पेड़ लगाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। इसमें खुदाई करना, मिट्टी हटाना, पेड़ लगाना और उसे मिट्टी से ढंकना आदि शामिल है। मा कहते हैं कि उन्हें अपने कार्य के दौरान गंभीर चोटें भी लगी हैं।

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मा ने कहा कि पैर खराब होने के बाद शुरुआत में उन्होंने कमाई करने के लिए पेड़ लगाने का काम शुरू किया था ताकि इसके जरिए वह अपने परिवार की सहायता कर सकें और अपनी रोजी-रोटी चला सकें। 2008 में, उनकी कहानी चीनी मीडिया द्वारा व्यापक रूप से बताई गई थी और एक सैनिक होने के कारण सरकार ने उन्हें इस काम के लिए हर तरह की वित्तीय सहायता मुहैया कराई।

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पेड़ों को मानते हैं सैनिक: इसके बाद मा ने अपने प्रयास को जारी रखा और रुपयों के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए पेड़ लगाना शुरू किया। वह इस काम के लिए आर्थिक मदद देने के लिए चीनी सरकार का भी धन्यवाद करना चाहते हैं। अब वह इस कार्य में पूरी तरह से रम चुके हैं। उनका कहना है कि जब वे पेड़ों के साथ समय बिताते हैं तो वे खुद को सुरक्षित और खुश महसूस करते हैं।

मा का कहना है कि मेरे लिए, यह केवल एक पेड़ नहीं हैं। मैं इन पेड़ों को उन सैनिकों के रूप में मानता हूं जिन्हें मैंने कमान दी है। इससे मुझे पूर्णता का अनुभव भी होता है। मा का कहना है जब तक मैं जीवित हूं, मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए पेड़ लगाता रहूंगा।

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