पाकिस्तान का संगठन दुनिया के सामने प्रतिबंधित और फेसबुक पर सक्रिय

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नई दिल्ली: पाकिस्तान का दूसरा नाम आतंक का पनाहगाह है। यही वजह है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता में भारी कटौती कर दी है जिसकी वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। यही नहीं पाकिस्तान को एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ)  ने ब्लैकलिस्ट भी रख दिया है जिसकी वजह से पाक को कई तरह की आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे ग्रे लिस्ट में डाला है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है।

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आतंक का सबसे बड़ा पनाहगाह कहे जाने वाला पाकिस्तान बीच-बीच में आतंकियों पर कार्रवाई की भी बात करता है लेकिन तब पाक सरकार की पोल खुल जाती है जब प्रतिबंधित आतंकी सरगना की वहां की राजनीति में  पैठ दिखती है और वह राजनीतिक रूप से खूब सक्रिय नजर आता है। यही नहीं आतंकी संगठन की राजनीति में सक्रियता पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान  सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन पिछले दिनों पाकिस्तानी अखबार डॉन के सर्वे ने पाकिस्तान सरकार और आतंकी सांठगांठ की पोल कोल कर दी है।

पाकिस्तान है आतंकियों के पनाहगार 

पाकिस्तान में सरकार और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सरंक्षण में आतंकी किस तरह से अपनी कार्रवाई को अंजाम देते हैं यह किसी से छिपा नहीं है। पाकिस्तान खुद भी आतंक से बुरी तरह प्रभावित है लेकिन फिर भी वह इसपर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा है। पाकिस्तान ने वैश्विक दबाव के बाद करीब 64 आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है लेकिन वह प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक पर निर्भर है क्योंकि ये संगठन बहुत तेजी से सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों में अपनी पैठ बना रहे हैं। और खुलेआम बना रहे हैं।

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लगातार बढ़ रहे फॉलोअर्स

इन संगठनों को सोशल मीडिया पर बहुत आसानी से खोजा जा सकता है। यहां तक की फेसबुक पर तो लगभग सभी प्रतिबंधित संगठनों को संक्षिप्त नाम या स्पेलिंग डाल कर ही इनकी उपस्थिति मिल जाती है। बातें तब चौंकाती है जब इन संगठनों के पेज, समूह और इंडीविजुयल यूजर प्रोफाइल्स को बड़ी संख्या में वहां की जनता पसंद भी कर रही है। सोशल मीडिया पर अहले सुन्नत वल जमात (एएसडब्ल्यूजे) सबसे ज्यादा 200 पेज और ग्रुप के साथ मौजूद है। जीय सिंध मुत्तहिदा महज (जेएसएमएम) 160 पेज, सिपाह-ए-सहाबा (एसएसपी) 148 और बलूचिस्तान स्टुडेंट्स आर्गेनाइजेशन आजाद (बीएसओ-ए) 54 और सिपाह-ए-मुहम्मद 45 पेज के साथ सक्रिय है।

फेसबुक का जमकर इस्तेमाल

पाकिस्तान आतंकी संगठनों को अपनी सरजमीं पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी बराबर का स्थान देता है। जब शोध के दौरान प्रतिबंधित आतंकी समूह को तलाशने के लिए नाम डाला तो धरधरा के आतंकी संगठनों के पेज खुलकर सामने आ गए। और पता चला कि करीब हर प्रतिबंधित समूह खुलेआम सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा है। आधिकारिक तौर पर सरकार ने करीब 64 संगठनों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है| इन संगठनों के सदस्य अपनी बात आम लोगों तक पहुंचाने केलिए उनकी ही तरह की भाषा का उपयोग कर रहे हैं। ये संगठन आमतौर पर फेसबुक पर अपनी बातें उर्दू या रोमन उर्दू में करते हैं। ऐसा करने से उनकी पहुंच उनलोगों तक आसान हो जाती है जिन्हें वह प्रभावित करना चाहते हैं।

भारत के खिलाफ  उगलते  जहर

आतंकी संगठनों की पैठ कश्मीर तक में है और वह फेसबुक का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। इसके जरिए लगातार भारत के खिलाफ जहर भी उगल रहे हैं। यही नहीं कई पैसे वाले आतंकी संगठनों ने तो अपना मीडिया सेल भी बना रखा है। वे इसकी मदद से प्रेस रिलीज, उकसावे वाले धार्मिक उपदेश, भाषण के ऑडियो और वीडियो वॉल पर अपलोड करते हैं।

फेसबुक

चौंकाने वाली बात यह है कि फेसबुक किसी भी तरह की अश्लील, आतंकी गतिविधी वाले पेज को हटाए या पूरी तरह से ब्लॉक कर दे। यह फेसबुक की प्राथमिक कार्रवाइयों में से एक है। लेकिन पूरी जानकारी फेसबुक के पास मुस्तैद नहीं होने की वजह से फेसबुक इस तरह कि किसी भी कार्रवाई करने में असक्षम है।

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