माघ पूर्णिमा- माघ महीने में गंगा स्नान करने से इसी जन्म में मुक्ति प्राप्त हो सकती है

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माघ का महत्व

हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा व्रत होता है। इस वर्ष ये पर्व 19 फरवरी, मंगलवार को होगा। 27 नक्षत्रों में माघ पूर्णिमा को मघा नक्षत्र के नाम से भी जाना जाता हैं। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व बताया गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में स्नान करने आते हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने आैर उसके बाद जप और दान करने से सांसारिक बंधनो से मुक्ति मिलती है। माघ मास पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। इस माह में गंगा स्नान करने का विशेष महत्त्व है। जो लोग पूरे महीने न कर सकें वे तीन दिन अथवा माघ पूर्णिमा के एक दिन माघ स्नान अवश्य ही करें। पौराणिक कथा आें के अनुसार माघ महीने में गंगा स्नान करने से इसी जन्म में मुक्ति का प्राप्त हो सकती है। वहीं माह के अंतिम दिन माघ पूर्णिमा को स्नान करने वाले पर श्री कृष्ण की विशेष कृपा होती है आैर वे प्रसन्न होकर धन-धान्य, सुख-समृद्धि आैर संतान के साथ मुक्ति का आर्शिवाद प्रदान करते हैं।

माघ पूर्णिमा का महत्व

एेसी मान्यताहै कि माघ मास में देवता भी मानव रूप धारण करके पृथ्वी पर आकर वास करते है आैर प्रयागराज के तट पर स्नान, जप और दान करते हैं। इसी के चलते विश्वास किया जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन संगम होली का डंडा गाड़ा जाता है। इसी दिन भैरव जयंती भी मनार्इ जाती है। कहते हैं कि जो मनुष्य सदा के लिए स्वर्गलोग में रहना चाहते हैं, उन्हें माघ माह में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर प्रयाग तीर्थ में स्नान अवश्य करना चाहिए। माघ पूर्णिमा पर व्रत, स्नान, जप, तप,हवन और दान का विशेष महत्त्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ इस दिन पितरों का श्राद्ध करके गरीबों को दान भी करना चाहिए।

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एेसे करें माघ पूर्णिमा व्रत की पूजा

माघ पूर्णिमा व्रत की पूजा का विधान इस प्रकार है। सर्वप्रथम सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना में स्नान करना चाहिए। यदि ये संभव ना हो तो घर पर ही नहाने के पानी मे गंगाजल डालकर स्नान करें। स्नान के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करते हुए ऊँ घृणि सूर्याय नमः मन्त्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें। इसके बाद माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के बाद दान दक्षिणा करें आैर दान में विशेष रूप से काले तिल प्रयोग करें आैर काले तिल से ही हवन और पितरों का तर्पण करें। इस दिन झूठ बोलने से बचें।

कल्पवास की समाप्ति

प्रत्येक वर्ष माघ महीने में प्रयागराज में विशेष मेले का आयोजन होता है, जिसे कल्पवास मेला कहा जाता है। इस कल्पवास का भी माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ अंत हो जाता है। इस मास में देवी-देवताआें का संगम तट पर निवास होने के कारण कल्पवास का महत्त्व बढ़ जाता है। कहते हैं कि माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान करने से शारीरिक व्याधियां दूर हो जाती हैं। इस दिन तिल और कम्बल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है।

माघ पूर्णिमा व्रत कथा

इस व्रत की पौराणिक कथा इस प्रकार बतार्इ जाती है। जिसके अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर शुभव्रत नाम का विद्वान मगर लालची ब्राह्मण वो किसी भी प्रकार धन कमाना चाहता आैर एेसा करते करते वो बहुत जल्दी वृद्ध दिखने लगा आैर कर्इ बीमारियों से ग्रसित हो गया।तब उन्हें अहसास हुआ कि उसने सारा जीवन धन कमाने में ही नष्ट कर दिया है आैर मुक्ति के लिए कुछ भी नहीं किया। अब उद्धार के लिए विचार करते हुए उसे वह श्‍लोक याद आया, जिसमें माघ मास में स्नान का महत्त्व बताया गया था। शुभव्रत ने संकल्प किया कि वो भी माघ मास में पूरे महीने एेसा करेगा आैर माघ शुरू होने पर नर्मदा नदी में स्नान करने लगा। उसने लगातार 9 दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान किया परंतु दसवें दिन स्नान के बाद उसका स्वास्थ्य खराब हो गया आैर उसकी मृत्यु हो गर्इ। इसके बाद भी माघ मास में स्नान करने के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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