मेरठ : मतदाता सूची में मुर्दे भी जिंदा हो उठे!

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मेरठ। देश भर में बड़ी संख्या में नागरिक गुरुवार को आम चुनाव 2019 के पहले चरण के मतदान के उत्सव में भागीदार बने लेकिन इनमें से कुछ का अनुभव थोड़ा अलग रहा। उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी ब्रज मोहन उनमें से एक रहे जब वह यह देखकर हैरान रह गए कि उनके मरहूम पिता का नाम तो मतदाता सूची में है लेकिन खुद उनका नहीं है।

ब्रज मोहन अकेले नहीं हैं। मेरठ क्षेत्र में ऐसे कितने ही मामले देखे गए जिसमें जो मर चुके हैं, उनके नाम मतदाता सूची में पाए गए और जो जिंदा हैं उनके नाम सूची से गायब मिले। ब्रज मोहन ने चुनाव अधिकारियों को अर्जी देकर गुजारिश की कि उनके पिता मुरारीलाल का नाम मतदाता सूची से काट दिया जाए क्योंकि उनकी मृत्यु तीन साल पहले हो चुकी है।Ghost voters crowd electoral rolls in Meerut - Meerut News in Hindiब्रज मोहन ने आईएएनएस से कहा, ‘‘मैंने इन अधिकारियों से पहले भी कहा था कि मेरे पिता का नाम सूची से हटा दें लेकिन उनका नाम अभी भी सूची में है। स्तब्ध करने वाली बात यह है कि उन्होंने इसके बजाए मेरा ही नाम काट दिया।’’ मुरारीलाल का वोटर आईडी नंबर यूपी/80/396/0450226 है।

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इसी सदनपुरी इलाके में शोभा नाम की महिला रहती थीं जिनकी मौत दो साल पहले हो चुकी है लेकिन चुनाव अधिकारी जिन्हें अभी भी पात्र मतदाता मान रहे हैं। उनका वोटर आईडी नंबर सीएनआर2561307 है। इलाके के निवासी नंद कुमार ने बताया कि शोभा के परिजनों ने उनका नाम मतदाता सूची से हटवाने की कई बार कोशिश की लेकिन कुछ हुआ नहीं। 24 वर्षीय नंद कुमार ने बताया कि ऐसे कई लोग हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम सूची में है लेकिन उनका खुद का नाम इससे गायब है।

एक अन्य मतदाता शकील राजपूत ने कहा कि केवल उनका नाम नहीं बल्कि उनके परिवार के सभी चार सदस्यों का नाम मतदाता सूची में नहीं है। हालांकि, वे सभी नियमित रूप से मतदान करते रहे हैं। पूर्व सैनिक मोहन सिंह भंडारी अपनी पत्नी के साथ दिल्ली से मेरठ वोट डालने आए लेकिन उनका उत्साह जल्द ही हताशा में बदल गया।

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उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मतदाता सूची में अपना नाम खोजने के लिए तीन घंटे खर्च किए लेकिन पा नहीं सका। मतदाताओं के नाम ऐसे कैसे गायब हो सकते हैं!’’

पुरवा अहिरान क्षेत्र के राजीव लोधी, डालंचद व संजय (तीनों एक ही परिवार से संबद्ध) और गंगाशरण, मोहनलाल, विनोद कुमार, राजेंद्र, हीरादेई और मुकेश लोधी की मौत हो चुकी है और इन सभी के नाम मतदाता सूची में हैं। प्रॉपर्टी डीलर अवधेश कुमार ने कहा, ‘‘यह सभी नाम तो एक ही क्षेत्र के हैं। अगर मामले की ठीक से जांच की जाए तो निश्चित ही ऐसे सैकड़ों मामले सामने आएंगे।’’Image result for vote मेरठ से मौजूदा भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मामला ‘मानवीय चूक का हो सकता है या फिर कार्यकर्ताओं की साजिश का भी यह नतीजा हो सकता है।’ लेकिन, मुद्दा बहुत बड़ा है और इसकी अच्छे से जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी कोई गड़बड़ी न रहे। बहुजन समाज पार्टी के एक चुनाव अधिकारी ने कहा कि उनके वार्ड में करीब आठ हजार मतदाता हैं और इनमें से करीब 30-35 फीसदी का नाम सूची से गायब है।
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नटेशपुरम के एक बूथ लेवल अफसर अनिल कुमार रस्तोगी ने नाम को लेकर पैदा हुए विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि इतने लोगों का नाम गायब होने के पीछे वजह यह भी होती है कि जिन्होंने पहले वोट दिया है, उनकी सभासद, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की सूची अलग-अलग होती है।

लोगों को लगता है कि अगर एक सूची को उन्होंने ठीक करा लिया है तो अपने आप अन्य सूची भी अपडेट हो जाएगी। लेकिन, ऐसा नहीं होता। हर सूची के लिए अलग से विवरण देना होता है। यह भी एक वजह हो सकती है कि उनके घरों के नंबर बदल गए हों लेकिन उनका पुराना पता ही दस्तावेज में हो।

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