लाइन हाजिर: पुलिस महकमे में बात अंदर खाने की

0
515

1. एडीजी साहब की सांसें फूली
पुलिस मुख्यालय पर तैनात एक एडीजी साहब की सरकार को दी गई एडवाइजरी खुद साहब के गले पड़ गई है। गौरव यात्रा को लेकर साहब ने नीचे से आया फीडबैक सूबे की मुखिया को बताया लेकिन हुआ उल्टा। जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ रही है वैसे वैसे लोग विरोध कर कर रहे हैं, यात्रा से पहले एक समाज के बारे में बताया कि कहीं विरोध नहीं लेकिन खूब विरोध हो रहा है। ऐसे में गलत तस्वीर दिखाने वाले एडीजी साहब की सांसें इन दिनों फूली हुई हैं और अपनी खाल बचाने के लिए नए जतन कर रहे हैं। आनन-फानन में उस इलाके में तैनात रहे पुराने अफसरों से उम्मीद लगाई, उनको रातों रात वापस बुलाया। लेकिन सारे टोटके फेल हो गए! सो मैडम मुखिया का मूड़ उखडऩा लाजिमी था। और, जब सरकार नाराज हो जाए तो हवा बिगडऩा तय है। अत: साहब के चेहरे पर परेशानी देखी जा सकती है। उनकी इस परेशानी पर उनके चाहने वाले अफसर बड़े मजे ले रहे हैं। यह तो वक्त बताएगा कि यात्रा में आगे क्या होगा लेकिन साहब की सांसें फूली हुई हैं।

2. ऐडी पंजे पर पुलिस
आजकल एक जिले में पुलिस कप्तान की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है, चर्चा काम को लेकर नहीं उनके काम करने की स्टाइल को लेकर है। जिस तरह हर दो घंटे में थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की लोकेशन मंगवाई जा रही है वह भी फोटो सहित। जब से जिले में यह ट्रेड चला है सभी अजीब परेशानी में आ गए। पहले वाले टाइगर साहब खुद कूल रहते थे व अपने मातहत को भी कूल रखते थे लेकिन जब से नए टाइगर साहब आए हैं एक माह में ही पुलिस काम कम, पीटी परेड और अपनी लोकेशन में ज्यादा लग गई है। यह तो राम जाने आगे क्या होगा लेकिन अभी पुलिस ऐडी पंजे पर खड़ी हुई है।

3. एक एसीपी, सब पर भारी
जयपुर कमिश्नरेट के सबसे महंगे इलाके में तैनात एक एसीपी की जयपुर मुखिया के पास धमक उनके साथियों के साथ ही पूरी कमिश्नरेट में गूंज रही है। एसीपी का रुतबा ऐसा है कि बिना मर्जी के बड़े साहब किसी की पोस्टिंग तक नहीं करते! ऐसा नहीं है कि साहब उनसे दबे हुए हैं। बात यह है कि एसीपी साहब जयपुर में सबसे पुराने और करीब करीब किस इलाके में क्या खेल चलता है इस बारे में पूरी जानकारी रखने की काबिलियत रखते हैं जिसकी वजह से वे जयपुर मुखिया के आंखों के तारे बने हुए हैं। ऐसे में सफेद को काला करवाना हो या स्याह की सफेद, आंख बंद करके काम करवा लेते हंै। यह बात दीगर है कि उनकी पुरानी कारगुजारियां नए नवेलों को अभी तक पता नहीं चली हैं।

4. उम्मीदों के सहारे
जुगाड़ से बड़ा कोई नुस्खा नहीं है। राजधानी में तैनात रहे आधा दर्जन गामा आजकल इसी ट्रैक को अपनाए हुए हैं। मौजूदा दौर में चुनाव आयोग के आदेश से वे राजधानी के थानों से तो चले गए या जाने की तैयारी में हैं लेकिन राजधानी से मोह नहीं छूट रहा है। चाहे नॉन फील्ड ही, लगें राजधानी में। उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां पर सबने अपनी दुकान जमा रखी है। नॉन फील्ड होने के बाद दुकानदारी तो जारी रहेगी इसको लेकर अपने राजनेताओं के यहां पर हाजिरी लगा रहे हैं।
मोहम्मद अहमद

  • 1
    Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

loading...