…अब भी 50 फीसदी बांधों के कंठ सूखे!

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जयपुर। इस बार मानसून के दौरान कम बारिश होने का असर अब बांधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मासून विदा होने में कुछ दिन का समय बचा है, लेकिन अभी तक प्रदेश के छोटे-बड़े बांध अपनी भराव क्षमता से 47.70 प्रतिशत खाली पड़े हुए हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय  में प्रदेश को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश में बांधों की भराव क्षमता 12902.45 एमक्यूएम. है। अभी तक बांधों में 6748.03 एमक्यूएम पानी ही आया है। जो इनकी भराव क्षमता का 52.30 प्रतिशत ही है। पिछले साल इस समय तक बांधों में 8695.04 एम.क्यूएम पानी था, जो इस बार 15.09 प्रतिशत कम है।
छोटे बांध सबसे ज्यादा खाली 
प्रदेश में मौजूद छोटे बांधों में बारिश का पानी न के बराबर पहुंच रहा है। इसी का असर है कि छोटे बांध अपनी भराव क्षमता से 75 फीसदी खाली पड़े हैं। 4.25 एम.क्यूएम. से कम भराव क्षमता वाले 547 बांध हैं। इन बांधों की भराव क्षमता 971.65 एम.क्यूएम. है, लेकिन अभी तक इन बांधों में इनकी भराव क्षमता का मात्र 25.36 फीसदी ही पानी मौजूद है। वहीं मध्यम एवं लघु बांधों में भी भराव क्षमता का 35.78 फीसदी पानी मौजूद है। बड़े बांधों में भराव क्षमता  का 62.92 मौजूद है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो इस संकट से कैसे निपटा जाएगा।
15 अगस्त बाद आया 2737.99 एम. क्यूएम. पानी 
इस बार मौसम विभाग ने औसत से अधिक बारिश होने का अनुमान लगाया था। शुरुआती कुछ दिनों तक अच्छी बारिश दर्ज भी की गई। लेकिन फिर मौसम थोड़ा कमजोर पड़ गया। इसी का असर है कि बांध अपनी क्षमता से बहुत खाली पड़े हैं। मानसून एक बार फिर से प्रदेश भर में सक्रिय हुआ है और कई जिलों में अच्छी बारिश् दर्ज भी की गई है। प्रदेशभर के छोटे-बड़े सभी प्रकार के बांधों की बात करें तो 15 अगस्त के बाद 2737.99 एम.क्यूएम. पानी आया है। जो वर्तमान में बांधों में मौजूद पानी का 40.57 प्रतिशत है।
बांधों में पानी 
पूर्ण भराव एम. क्यूएम वर्तमान भराव एम.क्यूएम प्रतिशत
12902.45 6748.03 52.30
12902.45 8695.04   67.39
दो सितंबर 2017 को
15 अगस्त 2018 को
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