जाने, संजय दत्त की बायोप‍िक में झूठी हैं ये बातें

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मुंबई। संजय दत्त की बायोपिक संजू की जबरदस्त कमाई दसवें दिन भी जारी है। ‘संजू’ ने देशभर में लगभग 265.97 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर लिया है। हालांकि, कई क्रिटिक्स इस बायोपिक को संजय दत्त की छवि चमकाने वाला पीआर स्टंट मान रहे हैं।फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने पर्दे पर संजय दत्त की लाइफ को उतारा लेकिन उनकी छवि चमकाने के लिए कई झूठ भी दिखाए हैं। यहां तक कि अपनी ही फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस को लेकर भी राजू हिरानी बड़ी साफगोई से झूठ बोल गए हैं।

सीन 1 : संजय दत्त के रोल में रणबीर कपूर अपने पिता सुनील दत्त से शिकायत करते हैं कि सारी अच्छी स्क्रिप्ट शाहरुख और आमिर के पास चली जा रही हैं। इस दौरान वह उन्हें अपनी कार में रखी कई स्क्रिप्ट दिखाते हैं, जिसमें से एक स्क्रिप्ट मुन्नाभाई एमबीबीएस की होती है। सुनील दत्त देखते हैं और संजू से फिल्म की कहानी पूछते हैं, जो वह नहीं बता पाते हैं। तब सुनील दत्त कहते हैं कि इस फिल्म में उन्हें उनके पिता का रोल करना है।

सच्चाई: संजय दत्त मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए पहली च्वॉइस नहीं थे। ये फिल्म पहले शाहरुख खान को ऑफर की गई थी। संजय दत्त को पहले फिल्म में जहीर का रोल मिला था, जो बाद में जिम्मी शेरगिल ने निभाया था।संजय दत्त ने स्क्रिप्ट सुनने के बाद इस रोल के लिए हां कह दिया था। बाद में पीठ में दर्द के चलते शाहरुख को ये फिल्म छोड़नी पड़ी और संजय दत्त को लीड रोल मिला। ऐसे में राजू हिरानी ने अपनी ही फिल्म के बारे में संजू में झूठ बोला है।

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सीन 2: रॉकी के प्रीमियर के दौरान संजय दत्त को एहसास होता है कि वह ड्रग्स की खतरनाक लत के शिकार हो गए हैं। ये लत उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी दौरान वह अपने पिता से लिपटकर ड्रग्स की इस लत से छुटकारा दिलाने के लिए मदद मांगते हैं।

 

सच्चाई: संजय दत्त रॉकी की रिलीज के बाद भी ड्रग एडिक्ट थे। संजय दत्त ने कई इंटरव्यू में ड्रग्स की लत की एक कहानी सुनाई है। संजय दत्त ने कहा था- एक सुबह मैं सोकर उठा तो मैंने अपने नौकर से कहा जाकर कुछ खाना लेकर आओ। संजय दत्त को देखकर नौकर रोने लगा। जब उन्होंने कारण पूछा तो उसने बताया कि वह दो दिन बाद सोकर उठे हैं। उनकी इस हालत से पूरा घर परेशान था। संजय दत्त के मुताबिक मैंने अपना चेहरा शीशे में देखा तो मेरी आंखें सूजी हुई थीं। तब मैं अपने पिता के पास गया और उनसे इस लत को छुड़ाने के लिए मदद मांगी थी।

सीन 3: संजय दत्त को AK56 रायफल रखने के जुर्म में मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया जाता है। पुलिस स्टेशन में संजय दत्त बताते हैं कि किस तरह से बाबरी मस्जिद गिरने और मुंबई दंगों में मदद के लिए धमकियां मिली थीं। इसके चलते उन्हें अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने हनीफ कड़ावाला और समीर हिंगोरा के जरिए उन्हें AK56 रायफल दी थी।

 

सच्चाई: फिल्म के इस सीन में अधूरा सच दिखाया गया है। संजय दत्त के कबूलनामे की शुरुआत अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहिम से मुलाकात से हुई थी। संजय दत्त साल 1991 में दुबई में यलगार फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। यहां पर फिल्म के प्रोड्यूसर और एक्टर फिरोज खान ने संजय दत्त की मुलाकात अनीस इब्राहिम से करवाई थी। ये मुलाकात आगे चलकर दोस्ती में बदल गई। बाद में धमकी मिलने के बाद संजय ने अनीस से मदद मांगी थी। हालांकि, फिल्म में संजय दत्त और अनीस इब्राहिम के रिश्ते पर पर्दा डाल दिया गया है और उनका आधा ही कबूलनामा दिखाया।

सीन 4: जेल से छूटने के बाद संजय दत्त दिल्ली स्थित एक मंत्री से मिलते हैं। ये मंत्री संजय दत्त की बात सुनते-सुनते सो जाता है।

सच्चाई: साल 1997 में जेल से छूटने के बाद संजय दत्त अपने पिता सुनील दत्त के साथ सीधे बाला साहेब ठाकरे से मिलने पहुंचे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक बालासाहेब ने संजय दत्त को डांट भी लगाई थी। जब सुनील दत्त की किसी ने मदद की थी तब वह बालासाहेब ठाकरे के पास पहुंचे थे। इसके बाद से ही संजय दत्त को लेकर शिव सेना के मुखपत्र सामना में लेख लिखा गया। लेकिन, फिल्म में बालासाहेब ठाकरे का जिक्र भी नहीं है। इसे लेकर राजकुमार हिरानी की काफी आलोचना भी हो रही है।

 

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