RBI अधिनियम की धारा 7 की मदद नहीं ले रही है सरकार : वित्त मंत्रालय

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मंत्रालय ने अपने अधिकारिक बयान में कहा है कि आरबीआई अधिनियम के अंतर्गत केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता आवश्यक और शासन द्वारा स्वीकृत है और सरकार इसका सम्मान करती है. सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों को ही अपने कामकाज में सार्वजनिक हित और भारतीय अर्थव्यवस्था का सम्मान करना चाहिए. इसके लिए समय-समय पर सरकार और आरबीआई के बीच कई मुद्दों पर व्यापक परामर्श होता है।
साथ ही यह भी कहा गया कि यह नियम सभी नियामकों पर समान लागू होता है. सरकार ने कभी भी इस परामर्शों को सार्वजनिक नहीं किया, केवल अंतिम निर्णयों की ही सूचना दी जाती है. सरकार इन परामर्शों से मुद्दों पर अपना मुल्यांकन बताकर समाधान सामने रखती है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगी।
रिपोर्टों के मुताबिक यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार जल्द ही आरबीआई अधिनियम की धारा 7 का आह्वान कर सकती है, जो कि सरकार को सार्वजनिक हित में केंद्रीय बैंक के गर्वनर को निर्देश जारी करने की अनुमति देती है. हालांकि स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका होगा, जब इस खंड का आह्वान किया जाएगा।

आरबीआई अधिनियम 1934 औपनिवेशिक युग के दौरान सक्रिय हुआ था. औपनिवेशिक युग यह कहता था कि देश की हर संस्था तख्त के नीचे आता है, और वर्तमान परिवेश के हिसाब से सरकार ही देश की तख्त है. बहुत से लोग मानते हैं कि आरबीआई एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन धारा 7 बताती है कि यह पूर्णत स्वायत्त नहीं है. केंद्रीय बैंक का कार्य है मौद्रिक नीति तैयार करना और सरकार का काम सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक कल्याण के कार्य करना. इसलिए दोनों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

आरबीआई के डिप्टी गर्वनर विरल आचार्य के हाल ही में दिए बयान के बाद केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच तनाव पैदा हो गए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता कम करना संभावित आपदाजनक है. इसके बाद मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई को 2008-14 के बीच उधार देकर बुरे ऋणों का ठीकरा आरबीआई पर फोड़ दिया. जिसके बाद सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच तनाव उजागर हुआ।

कोहली ने कहा कि इस मुद्दे पर एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है. आरबीआई को यह कल्पना नहीं करना चाहिए कि वो एक स्वायत्त संस्था है और सरकार को भी केंद्रीय बैंक की महत्ता स्वीकार करनी चाहिए।
आचार्य के बयान के बाद इस बात का भी अनुमान लगाया जा रहा है कि धारा 7 के आह्वान के बाद अरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

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