savan mah ki news श्रावण: रूद्राभिषेक-सहस्त्रघटाभिषेक के लिए शिवालय बुक

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महानगर संवाददाता
जयपुर। देवशयनी एकादशी पर 23 जुलाई से साधु-संतों का चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इसके लिए मंदिरों में संतों का आगमन शुरू हो गया है।
जैन मंदिरों में चातुर्मास पर जैन मुनियों के सान्निध्य में कई अनुष्ठान और प्रवचन होंगे। 27 जुलाई क गुरु पूर्णिमा के दूसरे दिन से श्रावण मास का शुभारंभ होगा।

श्रावण का पहला सोमवार 30 जुलाई को और पहला प्रदोष 9 अगस्त को होगा।

ये दोनों दिन शिव पूजा के लिए खास माने जाते हैं। इन तिथियों में शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए भीड़ उमड़ेगी।

चातुर्मास के चलते विवाह नहीं होंगे, किंतु धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन आदि कार्यक्रम बहुतायत से होंगे।

श्रावण मास में इस बार हर दूसरे अथवा तीसरे दिन कोई न कोई पर्व, व्रत अथवा शुभ तिथि रहेगी।

पं सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चार माह तक विवाह सहित अन्य शुभ कार्य नहीं होंगे, किंतु धार्मिक कार्य यथावत चलते रहेंगे।

शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु इस एकादशी से चार माह क्षीर सागर में विश्राम करते हैं।

इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। श्रावण मास में उनकी विशेष पूजा का विधान है।

साधु-संत अपनी यात्राएं बंद कर मंदिरों तथा अन्य देव स्थानों पर चातुर्मास करेंगे।

सनातनी और जैन मंदिरों में संत एवं महात्माओं का एकादशी से आगमन प्रारंभ हो जाएगा।

शिव पूजा-आराधना की खास तिथियां

श्रावण सोमवार- पहला 30 जुलाई, दूसरा 6 अगस्त, तीसरा 13 अगस्त, चौथा 20 अगस्त को होगा।

प्रदोष-पहला 9 अगस्त और दूसरा 23 अगस्त को। 10 अगस्त को पुष्य नक्षत्र योग का विशेष संयोग रहेगा।

मंगला गौरी व्रत और पूजन 31 जुलाई को होगी। मोना पंचमी 3 अगस्त को होगी।

इसके बाद 7 को कामिका एकादशी, 9 को प्रदोष, शिव चतुर्दशी व्रत हरियाली अमावस्या 11 को, सिंजारा दोज 13 को,

नाग पंचमी 15 को, कल्कि अवतार दिवस 16 को मनेगा।

संत तुलसीदास जयंती 17 को, महाकाल जयंती 20 को, 22 को पुत्रदा एकादशी, 23 को प्रदोष व्रत, 25 को व्रत

पूर्णिमा, 26 को स्नान-दान पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा।

महाकाल नवमी व कजलिया 27 को मनाई जाएगी।

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