SC का फैसला- आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने का फैसला रद्द

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वर्मा ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी. वर्मा ने केंद्र पर आरोप लगाया था कि उनको अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजा गया है।
उच्चतम न्यायालय ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर मंगलवर को बहाल करते हुए उनके अधिकार वापस लेने और छुट्टी पर भेजने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया।

शीर्ष अदालत ने हालांकि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच पूरी होने तक वर्मा पर कोई भी बड़ा निर्णय लेने पर रोक लगा दी है।

उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी निर्णय सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिया जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

वर्मा का सीबीआई निदेशक के तौर पर दो वर्ष का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आलोक वर्मा को हटाने से पहले सिलेक्ट कमिटी से सहमति लेनी चाहिए थी. जिस तरह सीवीसी ने आलोक वर्मा को हटाया, वह असंवैधानिक है. यह फैसला केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका है. चीफ जस्टिस के छुट्टी पर होने के कारण जस्टिस केएन जोसेफ और जस्टिस एसके कौल की बेंच यहा फैसला सुनाया।

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पद पर बने रहेंगे, लेकिन वे कोई भी नीतिगत फैसला अभी नहीं ले सकेंगे. कोर्ट ने ये भी कहा कि कानून के तहत सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने का अधिकार नहीं. कोर्ट आगे कहा कि उच्च स्तरीय कमिटी मामले की जांच कर सकती है. इस कमिटी में पीएम और सीजेआई शामिल होंगे।

सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच जंग छिड़ गई थी. इसके बाद ही ये मामला सार्वजनिक हो गया. इसके बाद ने सरकार ने मामले को दबाने के लिए 23 अक्टूबर 2018 के दिन दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया था. सारे मामले के सामने आने के बाद ही अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

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