- आमेर के ठाठर गांव में ईको सेंसेटिव जोन में प्राइम सिटी और मोहम्मद नगर नाम से अवैध कॉलोनी, 1200 भूखंड बेचे
जाने की तैयारी
- शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स के निदेशक/पार्टनर बद्री विशाल शर्मा, सुनील शर्मा खातेदार गज सिंह समेत अन्य की मिलीभगत से बसा रहे हैं ईको सेंसेटिव जोन में अवैध कॉलोनी
- सिवाय चक, वन विभाग और जलाशय क्षेत्र की भूमि भी भू-माफियाओं ने हथियाई
जयपुर। राजधानी में आमेर के ठाठर गांव में ईको-सेंसेटिव जोन में पचास बीघा कृषि भूमि पर बसाई जा रही प्राइम सिटी और मोहम्मद नगर के नाम की अवैध कॉलोनी में सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण कर लिया है। सरकारी जमीन पर भी भू-माफियाओ ने कृषि भूमि के साथ वन विभाग, सिवाय चक, गैर मुमकिन पहाड़ और वाटर बॉडी की जमीन पर अवैध कब्जा करके भूखण्ड सृजित कर दिए हैं और इन्हें बेचा भी जा रहा है। कानूनन वैसे तो दोनों कॉलोनियां ही अवैध है। अव्वल तो ईको सेंसेटिव जोन में कृषि भूमि पर कॉलोनी या कमर्शियल गतिविधियां नहीं हो सकती हैं।
जेडीए और नगर निगम से बिना अनुमति और लैंड कंवर्जन करवाए बिना ही भूमाफिया खातेदारों से मिलकर अवैध कॉलोनी बसा रहे है। ईको-सेंसेटिव जोन में कृषि के अलावा कोई दूसरा कार्य नहीं हो सकता है। आवासीय कॉलोनी, वाणिज्यिक या कॉमर्शियल गतिविधियों पर पूर्णतया पाबंदी है। बावजूद इसके शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स के निदेशक/पार्टनर बद्री विशाल शर्मा, सुनील शर्मा कृषि की चालीस बीघा जमीन पर गैर कानूनी रुप से प्राइम सिटी के नाम से अवैध कॉलोनी बसा रहे हैं, वहीं पास में 10 बीघा में मोहम्मद नगर से दूसरी कॉलोनी भी काटी जा रही है। प्राइम सिटी और मोहम्मद नगर से सटी वन विभाग, सिवाय चक, वाटर बॉडी की जमीनों को भी अवैध कॉलोनी में शामिल कर लिया है और वहां भी भूखण्ड सृजित करके बेचे जा रहे हैं। प्राइम सिटी तो रेरा के नाम से रजिस्टर्ड होना बताकर काटी जा रही है, जबकि यह ना तो रेरा से रजिस्टर्ड है और ना ही जेडीए-नगर निगम से स्वीकृत है। ईको-सेंसेटिव क्षेत्र होने के कारण यहां आवासीय कॉलोनी मंजूर भी नहीं हो सकती है। शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स के निदेशक/पार्टनर बद्री विशाल शर्मा, सुनील शर्मा ने सरकारी जमीन पर भी भूखण्ड सृजित कर दिए हैं। गैर मुमकिन पहाडी से सटी जमीन, सिवाय चक और वन विभाग की जमीन को भी प्राइम सिटी के नक्शे में सृजित करके भूखण्ड बेच रहे हैं। इस कृषि भूमि पर दो कुओं और एक बावड़ी की जमीन को समतल करके भूखण्ड सृजित कर दिए हैं, जबकि जमाबंदी में आज भी इनका अंकन है। नियमानुसार ऐसी जमीन का बेचान विधि विरुद्ध है। बावजूद इसके कंपनी के पजेशन लेटर को रेरा का बताते हुए भू-माफिया भोले-भाले लोगों को गुमराह करके भूखण्ड बेचने में लगे हुए हैं। लोग भी जेडीए, नगर निगम से बिना जानकारी लिए अवैध कॉलोनी के भूखण्ड खरीद रहे हैं।
खातेदार की भी मिलीभगत
अवैध कॉलोनी बसाने के कृत्य में स्थानीय खातेदारों की भी मिलीभगत सामने आई है। एग्रीमेंट के आधार पर जमीन बेचने और कॉलोनी सृजित करके भूखंड बेचकर कमाई करने का सौदा हुआ है। दोनों अवैध कॉलोनी के आसपास वन विभाग, सिवाय चक, जलाशय, गैर मुमकिन पहाड़ की जमीनें भी है। इन जमीनों पर भी भू-माफिया ने कॉलोनी सृजित कर दी हैं। इनमें खातदारों की भी मिलीभगत है। लोगों को झांसा देकर ईको सेंसेटिव जोन एवं सरकारी जमीन के भूखंड भी बेचे जा रहे हैं। शर्मा कॉलोनाइजर्स एण्ड डवलपर्स के निदेशक/पार्टनर बद्री विशाल शर्मा, सुनील शर्मा, खातेदार एवं होटेलियर्स गज सिंह अलसीसर समेत अन्य की मिलीभगत से ईको सेंसेटिव जोन में अवैध कॉलोनी प्राइम सिटी बसा रहे हैं।
जमा पूंजी डूबने का खतरा
वन विभाग की दीवार भी नहीं छोड़ी
मोहम्मद नगर और प्राइम सिटी नाहरगढ़ सेंचुरी से जुड़ी पहाड़ी के नीचे है। मोहम्मद नगर तो पूरी तरह से पहाड़ी के नीचे हैं। पहाड़ी के नीचे वन विभाग ने ऊंची-उंची दीवारें भी बना रखी है, ताकि कोई सेंचुरी में नहीं आ सके और वन्यजीव आबादी क्षेत्र में आने से बचे। भू-माफियाओं ने इस दीवार से सटकर भूखंड सृजित कर दिए हैं। जो कि गैर कानूनी है। वन अधिनियम के तहत दीवार से पच्चीस मीटर दूरी तक कोई निर्माण और पट्टे नहीं दिए जा सकते हैं। बावजूद इसके भू माफिया धडल्ले से भूखंड बेचने में लगे हुए हैं। वन विभाग नाहरगढ अभयारण्य के अधिकारी और कर्मचारी भी अवैध कॉलोनी पर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।
शिकायत पर एक्शन नहीं, पीआईएल की तैयारी
ईको सेंसेटिव जोन में अवैध कॉलोनी प्राइम सिटी, मोहम्मद नगर को ध्वस्त करने और कृषि भूमि को सिवाय चक घोषित करने को लेकर धरोहर बचाओ समिति राजस्थान, जयपुर आमेर विरासत फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, मुख्य सचिव, आयुक्त जेडीए, जिला कलेक्टर, प्रमुख सचिव वन विभाग को शिकायत दी है। शिकायत में आमेर तहसीलदार के नोटिस, कोर्ट स्टे, मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए अवैध कॉलोनी को हटाने की मांग की है। धरोहर बचाओ समिति राजस्थान के उपाध्यक्ष एडवोकेट जितेंद्र सिंह, जयपुर आमेर फाउंडेशन के अध्यक्ष मनीष शर्मा ने शिकायत में बताया कि इन दोनों अवैध कॉलोनी से ईको सेंसेटिव जोन खतरे में है। साथ ही इलाके की शांति भी प्रभावित होगी। जल्द कार्यवाही नहीं होने पर राजस्थान हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाई जाएगी और आंदोलन किया जाएगा।




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