
करौली। प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के बीच छिड़ी सियासी बयानबाजी के बीच बुधवार को करौली में पायलट का जवाब सामने आया। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर गहलोत का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने संबोधन के दौरान कई ऐसे संकेत दिए, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में गहलोत के हालिया बयानों का जवाब माना जा रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट की प्रतिमा के अनावरण समारोह में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि उन्होंने राजनीति में हर व्यक्ति का सम्मान किया है और उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा संभलकर बोलते हैं, क्योंकि "मुंह से निकली हुई बात वापस नहीं आती।"
पायलट ने कहा, “संघर्ष जरूरी है, सच्चाई के साथ खड़ा होना जरूरी है। जीवन और राजनीति में संयम, संतोष और सम्मान का बहुत महत्व है। दुनिया के लोग हमारे साथ कैसा व्यवहार करेंगे, यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमारा आचरण कैसा होगा, यह पूरी तरह हमारे नियंत्रण में है।”
'हम आपस में ही पद बांट दें तो विचारधारा और संगठन कहां जाएंगे'
अशोक गहलोत ने हाल ही में कहा था कि सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने में उनकी भूमिका रही और इस बात को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। इस बयान पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देते हुए पायलट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का काम पद बांटना नहीं होता।
उन्होंने कहा, “हम किसी भी पद पर हो सकते हैं, लेकिन हमारा काम एक-दूसरे को पद बांटना नहीं है। यदि हम आपस में ही पद बांटने लगें तो फिर विचारधारा, संगठन और जनता का क्या होगा? हमारा कर्तव्य पूरी निष्ठा और सच्चाई के साथ जनता की सेवा करना है।”
'फल की इच्छा से राजनीति करने वाला हमेशा नाखुश रहेगा'
पायलट ने राजनीति में पद और महत्वाकांक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समय, संगठन और परिस्थितियों के अनुरूप योग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलती है। उन्होंने कहा, “यदि कोई व्यक्ति केवल पद या फल प्राप्ति की इच्छा से राजनीति करता है तो वह अधिकतर समय असंतुष्ट ही रहेगा। लेकिन जो व्यक्ति जनता के बीच रहकर उनके सुख-दुख में भागीदार बनता है, वही वास्तव में संतुष्ट और सफल होता है।”
उन्होंने कहा कि राजनीति में परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन आज भी जनता ईमानदारी और मेहनत से काम करने वाले लोगों का सम्मान करती है। इस दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यदि हम नेता ही भविष्यवाणी करने लगेंगे तो फिर जनता को कौन पूछेगा। एडवांस बुकिंग वाले मामलों का कोई सिर-पैर नहीं होता।”
'मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं'

पायलट ने कांग्रेस की एकजुटता और राजनीतिक शालीनता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के साथ उन्होंने राजनीति में काम किया है, उन सभी का वह दिल से सम्मान करते हैं। पायलट ने कहा, “विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। सच को पहचानना मुश्किल नहीं होता। आंख में आंख डालकर देखने से पता चल जाता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या नहीं।”
उन्होंने कांग्रेस के 'मोहब्बत की दुकान' वाले संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि असहमति रखने वालों को भी साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें मोहब्बत की दुकान खोलनी है। कोई आपसे असहमत भी हो तो उसके कंधे इतने दबा दो कि वह आपके साथ चलने को तैयार हो जाए।”
'सच्चा नेता वही जो लोभ और पद की दौड़ से दूर रहे'
अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट को याद करते हुए सचिन पायलट भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि राजेश पायलट ने अंतिम सांस तक कांग्रेस के सच्चे सिपाही के रूप में जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, “सच्चा जननेता वही होता है जो लोभ, लालच और पदों की अंधी दौड़ से दूर रहकर जनता का विश्वास जीतने और उनके कल्याण के लिए कार्य करे। ऐसे नेताओं को इतिहास हमेशा सम्मान के साथ याद रखता है।”
भाजपा सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप
सचिन पायलट ने प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।उन्होंने कहा कि सरकार में मनरेगा को सीधे बंद करने का साहस नहीं है, इसलिए उसे धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घट रहे हैं, जबकि खाद, बीज, बिजली और पानी की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। पायलट ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और फसल खराब होने की स्थिति में बीमा कंपनियों से मुआवजा प्राप्त करना भी कठिन हो गया है।
नीट पेपर लीक मामले में सरकार को घेरा
पायलट ने नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस घोटाले ने लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा, “22 लाख से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। माता-पिता अपना पेट काटकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन परीक्षा माफियाओं की वजह से उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। अब सरकार इस मामले की जिम्मेदारी लेने से बच रही है।”
गहलोत-पायलट विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
गौरतलब है कि हाल ही में अशोक गहलोत द्वारा दिए गए बयानों के बाद कांग्रेस की आंतरिक राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। ऐसे में करौली में आयोजित यह कार्यक्रम गहलोत के बयान के बाद पायलट की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पायलट ने पूरे संबोधन के दौरान किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके कई बयान राजनीतिक संदेश देने वाले माने जा रहे हैं। कांग्रेस के भीतर इन टिप्पणियों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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