
जयपुर। विश्वभर में अपनी रंगाई-छपाई उद्योग के लिए पहचान रखने वाला सांगानेर इन दिनों प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र की रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी अब रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहा है। इसके कारण बदबू, जलभराव और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि रोजगार के नाम पर उनकी सेहत और जीवन से समझौता कराया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि फैक्ट्री मालिक आर्थिक लाभ तो कमा रहे हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर रहे। लोगों ने मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और रिहायशी क्षेत्रों को जहरीले पानी से मुक्त कराया जाए।
CETP प्लांट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले पानी को साफ करने के लिए स्थापित कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) अपेक्षित क्षमता से काम नहीं कर रहा। आरोप है कि प्लांट के कई हिस्सों में तकनीकी खामियां हैं, जिससे पानी पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहा। साथ ही, कई स्थानों पर बने चैम्बरों से पानी ओवरफ्लो होकर खाली प्लॉटों, गलियों और सड़कों पर फैल रहा है, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसईपीडी (SEPD) के सदस्य अमित शर्मा ने भी वीडियो जारी कर CETP प्लांट की कथित कमियों और उससे हो रही परेशानियों को सार्वजनिक किया है।
ऑपरेटिंग कंपनी का दावा: प्लांट अधूरा, क्षमता से बहुत कम काम

महावीर कैम के वर्किंग पार्टनर मोहित चौहान का दावा है कि उनकी कंपनी ने फरवरी 2026 में प्लांट का संचालन संभाला था। उनके अनुसार, उससे पहले कई वर्षों से प्लांट के कई महत्वपूर्ण उपकरण काम नहीं कर रहे थे और पूरा प्लांट तकनीकी रूप से अधूरा था। उन्होंने बताया कि प्लांट की डिजाइन क्षमता 12 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, लेकिन वास्तविकता में यह केवल लगभग 2 एमएलडी पानी को ही साफ कर पा रहा है। उनका कहना है कि डिजाइन संबंधी कमियों के कारण पानी के उपचार की चारों आवश्यक प्रक्रियाएं प्रभावी ढंग से पूरी नहीं हो पा रही थीं। मोहित चौहान के अनुसार, पानी को पहले प्राथमिक स्तर पर साफ किया जाता है, फिर बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट, उसके बाद रेत और कार्बन फिल्ट्रेशन तथा अंत में आरओ और वाष्पीकरण (स्टीम) प्रक्रिया से उपचार किया जाता है। उनका आरोप है कि प्लांट की खराब डिजाइन और खराब हो चुकी मेम्ब्रेन के कारण यह पूरी प्रक्रिया प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पा रही थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी टीम के आने से पहले लगभग 90 प्रतिशत पानी बिना उपचार के बाइपास होकर सीधे द्रव्यवती नदी में छोड़ा जा रहा था, जबकि केवल 10 प्रतिशत पानी ही ट्रीट हो रहा था। उनके अनुसार, उनकी टीम ने प्रयास कर पानी की रिकवरी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंचाई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट परिसर के बाहर दो मड पंप लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से कथित रूप से अपशिष्ट जल छोड़ा जाता रहा है। उनका कहना है कि जब उन्होंने इन कमियों की जानकारी प्रबंधन को दी तो उनकी कंपनी को ही हटा दिया गया।
SEPD प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, एसईपीडी के डायरेक्टर प्रवीण शाह ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि भारी बारिश के दौरान कई बार चैम्बर चोक होने से पानी ओवरफ्लो होकर बाहर आ जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि प्लांट काम नहीं कर रहा। उनके अनुसार, CETP पूरी तरह संचालित है। प्रवीण शाह का कहना है कि महावीर कैम को इसलिए हटाया गया, क्योंकि कंपनी के पास अपशिष्ट जल उपचार का पर्याप्त अनुभव नहीं था। उनका आरोप है कि 4 महीने तक संचालन के दौरान कंपनी ने बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट प्रक्रिया को ही शुरू नहीं किया, जबकि प्रबंधन लगातार ऐसा करने के निर्देश देता रहा। उनके मुताबिक, इसी कारण करोड़ों रुपए की मेम्ब्रेन भी खराब हो गईं। उन्होंने बताया कि कंपनी ने दावा किया था कि पानी पूरी तरह ट्रीट हो चुका है, लेकिन जब उससे गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट मांगी गई तो वह उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने स्वयं जोखिम लेते हुए एक टैंकर ट्रीटेड पानी अपनी फैक्ट्री में मंगाकर उसका उपयोग किया। प्रवीण शाह ने यह भी आरोप लगाया कि महावीर कैम कंपनी को एसईपीडी के एग्जीक्यूटिव सदस्य अमित शर्मा की अनुशंसा पर नियुक्त किया गया था और दोनों के बीच पारिवारिक संबंध हैं। उनका कहना है कि कंपनी को हटाए जाने के बाद गलत सूचनाएं फैलाकर प्रबंधन की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने महावीर कैम और अमित शर्मा द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
- रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच रहे प्रदूषित पानी की तत्काल रोकथाम।
- द्रव्यवती नदी में बिना उपचार के पानी छोड़े जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच।
- प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
- प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण और सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। एक ओर स्थानीय लोग और पूर्व ऑपरेटिंग कंपनी CETP प्लांट की तकनीकी खामियों तथा प्रदूषण के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एसईपीडी प्रबंधन सभी आरोपों से इनकार करते हुए संचालन को सामान्य बता रहा है और पूर्व ऑपरेटिंग कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है। ऐसे में पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदूषण की वास्तविक वजह क्या है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
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