
- जनप्रतिनिधियों ने अतिक्रमण, सफाई, दुर्गंध और STP संचालन सहित विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
जयपुर। करोड़ों रुपए की लागत से विकसित की गई द्रव्यवती नदी परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। परियोजना की वर्तमान स्थिति, रखरखाव व्यवस्था और नदी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही समस्याओं को लेकर शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांसद राव राजेंद्र सिंह, सांसद मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया और अधिकारियों से परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर जवाब मांगा।
बैठक के दौरान द्रव्यवती नदी क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण, कई इलाकों में फैल रही दुर्गंध, नालों से सीधे नदी में जा रही गंदगी, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की कार्यप्रणाली और एनजीटी के दिशा-निर्देशों की पालना जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। जनप्रतिनिधियों ने परियोजना के रखरखाव और मॉनिटरिंग को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।
1400 करोड़ खर्च, फिर भी समस्याएं बरकरार
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि द्रव्यवती नदी परियोजना पर अब तक 1400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर गंदगी, अतिक्रमण और दुर्गंध जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी राशि परियोजना पर खर्च की गई है तो उसके अपेक्षित परिणाम धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से परियोजना के रखरखाव और निगरानी तंत्र की विस्तृत जानकारी भी मांगी।
विधायक गोपाल शर्मा ने रखे क्षेत्रीय समस्याओं के तथ्य

बैठक में विधायक गोपाल शर्मा ने सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के शास्त्री नगर, सुशीलपुरा, हसनपुरा और श्याम नगर क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में हुए अतिक्रमणों के कारण कई स्थानों पर पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे गंदगी और दुर्गंध की समस्या बढ़ रही है।
उन्होंने अधिकारियों के समक्ष संबंधित क्षेत्रों के तथ्य और स्थिति प्रस्तुत करते हुए अतिक्रमण हटाने तथा सफाई व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।
एनजीटी निर्देशों की पालना पर भी उठे सवाल
सांसद राव राजेंद्र सिंह ने बैठक में कहा कि द्रव्यवती नदी परियोजना को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप अब तक क्या कार्रवाई की गई और किन बिंदुओं पर कार्य शेष है।
उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
अधिकारियों की अनुपस्थिति भी बनी चर्चा का विषय
बैठक के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। जनप्रतिनिधियों ने माना कि द्रव्यवती जैसी महत्वपूर्ण परियोजना की समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों की पूर्ण भागीदारी आवश्यक है, ताकि समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लिए जा सकें।
एक माह में मांगी विस्तृत रिपोर्ट
बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि द्रव्यवती नदी परियोजना की संपूर्ण कार्यप्रणाली, एसटीपी प्लांट के संचालन, सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और एनजीटी दिशा-निर्देशों की पालना से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट एक माह के भीतर प्रस्तुत की जाए।
इसके साथ ही सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर द्रव्यवती नदी को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और जनहितकारी बनाने के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
द्रव्यवती को लेकर फिर तेज हुई जवाबदेही की मांग
बैठक के बाद यह साफ संकेत मिला कि द्रव्यवती नदी परियोजना से जुड़ी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधि अब अधिक सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि अतिक्रमण, गंदगी और दुर्गंध जैसी समस्याएं बनी रहती हैं तो आने वाले समय में परियोजना की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही पर और बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
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